गालूडीह.
घाटशिला प्रखंड की कृषि प्रधान बड़ाकुर्शी पंचायत के कई गांवों में धान में झुलसा रोग लगने से किसान चिंतित हैं. किसानों के अनुसार, उक्त बीमारी ज्यादातर हाइब्रिड फसल में लगी है. धान की फसल पकने को तैयार है. बड़ाखुर्शी के किसान कालीचरण सिंह, प्रफुल्ल सिंह, कृतिवास महतो, मधु सिंह, भोजहरी महतो, अशिमानंद महतो के साथ दर्जनों किसानों ने बताया कि बड़ाकुर्शी के कई मौजा के रकवों में विभिन्न प्रजाति के धान की रोपनी की गयी है. धान की दो-तीन किस्मों की फसल में रोग का प्रभाव कम है, लेकिन कुछ प्रजाति ऐसी है, जिसमें झुलसा रोग का असर काफी गंभीर है. झुलसा रोग धान फसल को काफी प्रभावित कर दिया है. किसानों ने बताया कि किसान रोग से बचाव के लिए कीटनाशक का छिड़काव कर रहे हैं. इसके बावजूद धान फसल अच्छा नहीं दिख रहा है. कई किसानों ने ऋण लेकर मोटी पूंजी लगाकर धान की खेती की है. अब फसल झुलसा रोग से ग्रसित हो गया. कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि धान फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए किसान कार्बेंडाजिम 12 प्रतिशत और मैनकोजेब 63 प्रतिशत को मिश्रण कर खेतों में छिड़काव करें. यह प्रक्रिया 10 से 12 दिनों के अंतराल पर दो बार करें. साथ ही ट्राइसाइक्लाज़ोल 75 प्रतिशत 120 ग्राम को 200 लीटर पानी में घोल तैयार कर प्रति एकड़ में छिड़काव करें.झुलसा रोग से फसलों को हो सकता है नुकसान : डॉ एन सलाम
दारीसाई क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के सह निदेशक डॉ एन सलाम ने कहा कि धान में झुलसा रोग पत्तियों, दानों और बालियों पर छोटे छोटे धब्बों के रूप में शुरू होता है. बाद में भूरे या काले रंग के घाव में बदल जाते हैं, जो पत्तों को सूखा देते हैं. इससे फसल को गंभीर हानि होती है. कई बार पहले पत्तियों पर छोटे नाव के आकार के नीले भूरे रंग के धब्बे बनते हैं, जो बाद में बड़े होकर सफेद या भूरे रंग के केंद्र में भूरे रंग के और किनारे-किनारे काले रंग के हो जाते हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
