मुसाबनी.
मुसाबनी प्रखंड के बादिया में वर्ष 1960 से संचालित मदरसा इस्लामिया अरबिया ताजबिदुल कुरान में पढ़ने वाले बच्चे इस ठंड में फर्श पर सोने को विवश हैं. मदरसा में अररिया (बिहार), झारखंड के जामताड़ा, जुगीसोल, कांजिया व आस-पास के गांवों के बच्चे रहकर हाफिज की पढ़ाई करते हैं. मदरसा में कुल 49 बच्चे हैं. वे समस्याओं के बीच शिक्षा ग्रहण करने को विवश हैं. मदरसा में मौलाना खुर्शीद, मौलाना अब्दुल हकीम, मौलाना अहमद, मौलाना अख्तर आदिल तथा कारी सुल्तान अहमद बच्चों को उर्दू, अरबी, हिंदी, अंग्रेजी व गणित पढ़ाते हैं. यहां अधिकतर बच्चे गरीब परिवारों से आते हैं. मदरसा में कुल चार कमरे हैं. दिन में बच्चे फर्श पर बैठा कर पढ़ते हैं. वहीं, रात में फर्श पर सोते हैं. मदरसा का भवन पुराना हो गया है. कमरों की कमी है.नहीं मिलती सरकारी सुविधा, चंदा से चलता है मदरसा
शिक्षकों के अनुसार, मदरसा को डायस कोड शिक्षा विभाग से मिला है. अब तक सरकारी मदद नहीं मिली है. बच्चों व शिक्षकों का खर्च चंदा से संग्रहित राशि से होता है. मदरसा के सदर आलम हुसैन तथा सेक्रेटरी आजाद खान है.
मिड डे मील की मांग की, लेकिन पहल नहीं हुई
शिक्षक मौलाना अख्तर आदिल के अनुसार, बीआरसी में कई बार आवेदन देकर मदरसा के बच्चों को मिड डे मील देने का अनुरोध किया. अबतक सुनवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि सरकारी सहायता के लिए प्रतिवर्ष आवेदन फॉर्म भी जमा किया जाता है.दो वर्ष पहले सांसद ने दिया था कंबल
सांसद ने बच्चों को ठंड से राहत के लिए दो वर्ष पूर्व कंबल उपलब्ध कराया था. वही कंबल बच्चे ओढ़ते हैं. बच्चों को ठंड से बचाने के लिए शिक्षकों व कमेटी के सहयोग से बरामदे में प्लास्टिक का परदा लगाया गया है. सुबह धूप निकलने पर पर्दे को हटा दिया जाता है. शाम को ठंड बढ़ने लगती है, तो प्लास्टिक के परदा लगा दिया जाता है. मदरसा में पेयजल व शौचालय की सुविधा है.
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