गालूडीह : दारीसाई क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक विनोद कुमार ने कहा कि 2012 से 2017 तक हर वर्ष औसत से अधिक बारिश हो रही है. हालांकि वर्षा पात वितरण में एकरूपता नहीं है. ग्लोबल वार्मिंग, बादल की अस्थिरता, बादल का इकट्ठा नहीं होना, वायु की गति में लगातार बदलाव आदि कारण से औसत से अधिक वर्षा के बावजूद पर्यावरण में डिसबैलेंस उत्पन्न हो रहा है. कहीं अधिक वर्षा हो रही है, तो कहीं कम. किसी माह औसत से अधिक बारिश हो रही है, तो किसी माह काफी कम. इससे खेत और किसानी पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है.
वर्षापात में एकरूपता नहीं, खेत व किसानी पर हो रहा असर
गालूडीह : दारीसाई क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक विनोद कुमार ने कहा कि 2012 से 2017 तक हर वर्ष औसत से अधिक बारिश हो रही है. हालांकि वर्षा पात वितरण में एकरूपता नहीं है. ग्लोबल वार्मिंग, बादल की अस्थिरता, बादल का इकट्ठा नहीं होना, वायु की गति में लगातार बदलाव आदि कारण से औसत […]

सितंबर की औसत बारिश 184.4, परंतु 10 दिनों तक सूखा रहा
विनोद कुमार ने बताया कि सितंबर की औसत बारिश 184 मिमी है, जबकि 11 सितंबर तक सूखा रहा. इससे डिस बैलेंस उत्पन्न हो रहा है. इस वर्ष जून में 183.5 मिमी, जुलाई में 513.4 मिमी और अगस्त में 236. 8 मिमी (औसत से अधिक) बारिश हुई. सितंबर में बारिश ने दगा दी. इससे बुरा प्रभाव पड़ा. हालांकि पूर्वानुमान है कि सितंबर 20 से हथिया नक्षत्र में बारिश होने की संभावना है.
2012 से 2017 तक बारिश का आंकड़ा
2012 में जनवरी से दिसंबर तक 1399.8 मिमी, 2013 में 1675. 6 मिमी, 2014 में 1222.8 मिमी, 2015 में 1516.2 मिमी, 2016 में 1268.9 मिमी और 2017 में अगस्त तक 1294.3 मिमी वर्षा हुई है.जबकि एक वर्ष की औसत वर्षा है 1199.7 मिमी है. छह साल में प्रति वर्ष औसत से अधिक वर्षा हुई है.
जून से सितंबर तक छह साल में औसत बारिश हुई
विनोद कुमार ने बताया कि सीजन में जून से सितंबर तक सिर्फ एक वर्ष 2014 को छोड़ कर औसत वर्षा हुई है. 2012 में जून से सितंबर तक 1033.5 मिमी, 2013 में 1008.9 मिमी, 2014 में 877.6 मिमी, 2015 में 1155.2 मिमी, 2016 में 1072.5 मिमी और 2017 में जून से अगस्त में 933.7 मिमी वर्षा हुई है.