बेटी, दामाद व पांच नाती के साथ सब्जी की लताें के बीच रहती हैं मालती सबर

चाकुलिया : चाकुलिया प्रखंड की मालकुंडी पंचायत के बड़ामचाटी गांव के सबर टोला में सरकारी लापरवाही ने विलुप्त होती आदिम जन जाति के सबर बदला हैं. 21वीं सदी में भी यहां के सबर सब्जी की लतों के बीच रहने को अभिशप्त हैं. टोला की मालती सबर सब्जी की लतों के बीच अपनी बेटी और दामाद […]

चाकुलिया : चाकुलिया प्रखंड की मालकुंडी पंचायत के बड़ामचाटी गांव के सबर टोला में सरकारी लापरवाही ने विलुप्त होती आदिम जन जाति के सबर बदला हैं. 21वीं सदी में भी यहां के सबर सब्जी की लतों के बीच रहने को अभिशप्त हैं. टोला की मालती सबर सब्जी की लतों के बीच अपनी बेटी और दामाद व पांच नाती को साथ रहने को विवश है. सरकारी उदासीनता से उसके नाम स्वीकृत पीएम आवास अधूरा है.

मालती सबर की झोपड़ी किसी आश्चर्य से कम नहीं है.
फूस की छोटी सी झोपड़ी पर सब्जी की लतों से भरी पड़ी हैं. चारों और पत्तों की लता है. दरवाजे के नाम पर एक साड़ी लटकी है. इसी झोपड़ी में वह सात सदस्यों के साथ रहती है. बरसात होने पर किसी दूसरे के घर के बरामदे में सोती है. मालती सबर के मुताबिक उसके नाम स्वीकृत पीएम आवास अधूरा है. राशि का भुगतान नहीं के कारण वह अपने आवास का निर्माण नहीं करा पा रही है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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