प्रतिनिधि, काठीकुंड : काठीकुंड प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में सड़क सुविधा की स्थिति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है. पिपरा पंचायत अंतर्गत झगड़ाही से लेदापाथर तक करीब डेढ़ किलोमीटर सड़क अब तक कच्ची है. वहीं शहरीटोला स्कूल से कोंडरापहाड़ी तक लगभग एक किलोमीटर सड़क का भी पक्कीकरण नहीं हो सका है. दोनों मार्गों का इस्तेमाल ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चों और किसानों द्वारा नियमित रूप से किया जाता है.
बारिश होते ही कीचड़ में बदल जाती हैं सड़कें
कच्ची सड़कों की सबसे अधिक परेशानी बरसात के दिनों में होती है. लगातार बारिश के बाद सड़क पर कीचड़ और पानी जमा हो जाता है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. दोपहिया और चारपहिया वाहनों के आवागमन में भी परेशानी होती है. कई स्थानों पर गड्ढे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते होने के कारण दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है.
बच्चों के स्कूल पहुंचने में भी परेशानी
शहरीटोला स्कूल से कोंडरापहाड़ी तक करीब एक किलोमीटर सड़क का उपयोग बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे करते हैं. बारिश के दौरान सड़क की स्थिति खराब होने से बच्चों को स्कूल आने-जाने में काफी परेशानी होती है. अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है.
खराब सड़क से किसानों की बढ़ रही परेशानी
ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है. खेतों से कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने में सड़क की खराब स्थिति बड़ी बाधा बन रही है. कच्ची सड़क के कारण वाहनों का गांव तक पहुंचना मुश्किल होता है. इससे किसानों को उपज ढोने में अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ता है.
ग्रामीणों ने पक्की सड़क निर्माण की उठाई मांग
ग्रामीणों का कहना है कि सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार से जुड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं. झगड़ाही-लेदापाथर और शहरीटोला स्कूल-कोंडरापहाड़ी मार्ग के पक्कीकरण से आसपास के गांवों को सालभर सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी. ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से दोनों सड़कों का जल्द निर्माण कराने की मांग की है.
