दुमका : एनसीईआरटी की पुस्तकों एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री को संताली भाषा की मौलिक ओल चिकी लिपि में प्रकाशित कराने की मांग को लेकर गुरुवार को दिसोम मांझी थान, दुमका परिसर में विभिन्न सामाजिक संगठनों, आदिवासी छात्र-छात्राओं और भाषा प्रेमियों की बैठक हुई. बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी से मिलकर एनसीईआरटी एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री को ओल चिकी लिपि में प्रकाशित करने का आग्रह किए जाने पर उनका आभार जताया गया.
संताली विद्यार्थियों को मातृभाषा में मिले गुणवत्तापूर्ण सामग्री
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि संताली भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है और इसकी अपनी वैज्ञानिक लिपि ओल चिकी है. ओल चिकी को यूनिकोड की मान्यता भी प्राप्त है. ऐसे में संताली विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा और अपनी लिपि में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना आवश्यक है.
चार राज्यों के संताली विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
छात्र-छात्राओं ने कहा कि एनसीईआरटी की पुस्तकें ओल चिकी लिपि में प्रकाशित होने से झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार समेत देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लाखों संताली विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा. इससे विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में विषयों को समझने में सुविधा होगी और संताली भाषा के विकास को भी मजबूती मिलेगी. उन्होंने इसे पंडित रघुनाथ मुर्मू के भाषा और लिपि के विकास से जुड़े सपने को आगे बढ़ाने वाला कदम बताया.
रघुवर दास के प्रयास की सराहना
बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रयास की सराहना करते हुए संताल समाज की ओर से उन्हें बधाई और जोहार प्रकट किया गया. वक्ताओं ने उम्मीद जतायी कि केंद्र सरकार इस मांग पर सकारात्मक पहल करेगी और संताली भाषा में शैक्षणिक सामग्री के प्रकाशन की दिशा में आवश्यक कदम उठायेगी.
ये लोग रहे मौजूद
मौके पर सुभाष किस्कू, सुनील हेम्ब्रम, सोनेलाल सोरेन, अर्जुन मुर्मू, जोसेफ टुडू, पकू हेम्ब्रम, सेलिना हांसदा, सुंदरी टुडू, निशा सोरेन, सिमोन मरांडी, साहेबराम किस्कू, अर्जुन टुडू, विकास टुडू सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र-छात्राएं मौजूद थे.
