दुमका : एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के आह्वान पर जिले के एलपीजी वितरकों ने सोमवार को विभिन्न मांगों को लेकर उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा. वितरकों ने प्रशासनिक शुल्क व होम डिलीवरी कमीशन में वृद्धि, ई-केवाईसी के भुगतान समेत कई मांगें उठायीं. मांगें पूरी नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गयी.
एक सितंबर से आंदोलनरत हैं वितरक
कहा गया कि इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के एलपीजी वितरक एक सितंबर से आंदोलनरत हैं. आंदोलन के प्रथम चरण में वितरकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया. सोमवार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया.
छह अक्टूबर को नहीं जमा करेंगे पैसा
निर्धारित कार्यक्रम के तहत पांच अक्टूबर को देशव्यापी प्रेस कॉन्फ्रेंस और छह अक्टूबर को ‘नो मनी नो इंडेंट’ के तहत पैसा जमा नहीं करने और लोड नहीं लेने का निर्णय लिया गया है. 26 अक्टूबर को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में धरना दिया जायेगा. इसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गयी है.
इन वितरकों ने सौंपा ज्ञापन
ज्ञापन सौंपने वालों में कुसुम गैस एजेंसी के राजेंद्र कुमार भगत, मोनार्क एचपी गैस एजेंसी के विकास मोदी, अंचित इंडेन के मनोज कुमार सिंघानिया, नारायणी एचपी गैस के प्रियम अग्रवाल, कृष भारत के आशा सिंघानिया, एचपी गैस वितरक के मनोज विल्सन मरांडी, श्री श्याम भारत गैस के हर्षित मोदी और गणपति बीजीजीवी के बाबूलाल मोदी शामिल थे.
वितरकों की प्रमुख मांगें
- अनुशंसा के अनुसार एलपीजी वितरकों के प्रशासनिक शुल्क और होम डिलीवरी प्रभार में तत्काल ₹75 प्रति सिलेंडर की अंतरिम वृद्धि की जाये.
- प्रत्येक ई-केवाईसी सत्यापन के लिए सार्वजनिक तेल कंपनियों द्वारा वितरकों को ₹236 का भुगतान किया जाये.
- तेल कंपनियों द्वारा एनएफआर /एआरबी सामग्री बेचने के लिए वितरकों पर दबाव नहीं बनाया जाये. नॉन-डोमेस्टिक सिलेंडर की बिक्री का अनुचित लक्ष्य भी नहीं थोपा जाये.
- आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के कथित उल्लंघन में हो रही एफटीएल की बिक्री तत्काल बंद की जाये.
- पीएनजी की अनिवार्यता समाप्त कर बंद किये गये नये घरेलू एलपीजी कनेक्शन तत्काल बहाल किये जायें.
- विक्रय अधिकारियों द्वारा एमडीजी के नाम पर वितरकों पर बनाये जा रहे अनुचित दबाव और ब्लैकमेलिंग की प्रवृत्ति पर रोक लगायी जाये.
