हंसडीहा . पीएम श्री उत्क्रमित उच्च विद्यालय, ककनी, सरैयाहाट, दुमका के शिक्षक विनय कुमार दास ने गुवाहाटी स्थित सीसीआरटी में आयोजित 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और विरासत का प्रभावी प्रस्तुतीकरण किया . प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से शिक्षक शामिल हुए . इस दौरान प्रतिभागियों को अपने-अपने राज्यों की संस्कृति, परंपरा और लोककला को दूसरे राज्यों के प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिला .
सिदो-कान्हू से झारखंडी लोककला तक की दी जानकारी
विभिन्न सत्रों के दौरान प्रतिभागियों ने अपने राज्यों के इतिहास, संस्कृति, परंपरा, लोककला, वेशभूषा, खान-पान, संगीत और अन्य सांस्कृतिक विशेषताओं को साझा किया .
झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए विनय कुमार दास ने सिदो-कान्हू और चांद-भैरव के गौरवशाली इतिहास से प्रतिभागियों को परिचित कराया . उन्होंने झारखंडी कला, त्योहार, लोककला, पारंपरिक वेशभूषा, खान-पान, हस्तकला और चित्रकला के साथ अनुपयोगी वस्तुओं से कलाकृतियां तैयार करने की कला के बारे में भी जानकारी दी .
प्रस्तुतीकरण और संवाद कौशल का भी मिला प्रशिक्षण
विनय कुमार दास ने पीपीटी प्रस्तुतीकरण के अलावा प्रभावी आवाज, आवाज में उतार-चढ़ाव और संवाद कौशल से जुड़े विभिन्न सत्रों में भी सक्रिय सहभागिता की . इन सत्रों के माध्यम से उन्हें शिक्षण और प्रस्तुतीकरण की नई तकनीकों को समझने के साथ अनुभव आधारित शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला .
पूर्वोत्तर की लोककलाओं को करीब से जाना
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को नृत्य, बांस कला सहित पूर्वोत्तर भारत की विभिन्न लोककलाओं से परिचित कराया गया . सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ विभिन्न ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा .
कामाख्या मंदिर समेत कई स्थलों का किया भ्रमण
प्रशिक्षण के दौरान गुवाहाटी, शिलांग, चेरापूंजी और मेघालय के विभिन्न पर्यटन एवं ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया गया . कामाख्या मंदिर, वशिष्ठ मुनि आश्रम और बालाजी मंदिर सहित अन्य स्थलों के भ्रमण से प्रतिभागियों को पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विविधता को करीब से समझने का अवसर मिला .
21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ने विभिन्न राज्यों के शिक्षकों को एक-दूसरे की सांस्कृतिक विरासत समझने और अनुभव साझा करने का मंच प्रदान किया . वहीं, झारखंड की संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर शिक्षक विनय कुमार दास के लिए भी महत्वपूर्ण अनुभव रहा .
