दुमका से रिपोर्ट आदित्यनाथ पत्रलेख
Dumka News: झारखंड के दुमका जिले के बासुकिनाथ क्षेत्र में बाल श्रम उन्मूलन और बाल अधिकारों के संरक्षण को लेकर संयुक्त निरीक्षण, बचाव और जागरूकता अभियान चलाया गया. अभियान का नेतृत्व श्रम अधीक्षक सूरज कुमार हांसदा ने किया. इस दौरान श्रम विभाग, पुलिस प्रशासन, चाइल्डलाइन, नीति आयोग और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की. अभियान में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी गीता कुमारी सहित विभिन्न प्रखंडों के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मी, नीति आयोग के जिला परियोजना सहयोगी अमलेश कुमार और कई स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे.
होटल, ढाबों और दुकानों में की गई जांच
संयुक्त टीम ने बासुकिनाथ क्षेत्र के विभिन्न होटल, ढाबों, दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया. इस दौरान बाल श्रम निषेध कानून और बाल संरक्षण संबंधी प्रावधानों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पोस्टर और सूचना पत्र चिपकाए गए. दुकानदारों और आम नागरिकों को बताया गया कि बाल श्रम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण बचपन का अधिकार है और उन्हें मजदूरी के लिए मजबूर करना कानूनन अपराध है. समाज अक्सर सस्ती मजदूरी की तलाश में बचपन की कीमत भूल जाता है, जबकि स्कूल की किताबों की जगह काम का बोझ उठाना किसी भी बच्चे की नियति नहीं होनी चाहिए.
चार बाल श्रमिकों को कराया गया मुक्त
निरीक्षण अभियान के दौरान चार बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें काम से मुक्त कराया गया. श्रम अधीक्षक सूरज कुमार हांसदा ने बताया कि बासुकिनाथ मेला क्षेत्र के विभिन्न प्रतिष्ठानों से 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का रेस्क्यू किया गया है. उन्होंने कहा कि बच्चों का स्थान स्कूल है और उन्हें शिक्षा से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. बाल मजदूरी न केवल बच्चों के अधिकारों का हनन है, बल्कि उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है.
बाल मजदूरी कराने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
सूरज कुमार हांसदा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति बच्चों से मजदूरी कराता पाया जाता है तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा. ऐसे मामलों में 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना और छह माह तक की सजा का प्रावधान है. रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को आवश्यक परामर्श सेवा उपलब्ध कराई गई. उनकी स्थिति का आकलन करने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई और पुनर्वास प्रक्रिया के लिए उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया.
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लोगों से सहयोग की अपील
अधिकारियों ने कहा कि बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य के अधिकारों का हनन है. उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि बाल श्रम के खिलाफ जागरूक रहें और ऐसे मामलों की जानकारी संबंधित विभागों को देकर बच्चों के सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य के निर्माण में सहयोग करें.
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