बारिश ने तोड़ी फूलगोभी किसानों की कमर, खेत से नर्सरी तक तबाही

रामगढ़ के किसानों की फूलगोभी की फसल भारी बारिश से बर्बाद हो गई है. खेतों में जलजमाव से पौधे सड़ रहे हैं और तैयार फसल भी गल रही है. ऐसे में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

संवाददाता, रामगढ़. रामगढ़ प्रखंड की लतबेरवा पंचायत के खसिया, खिलकिनारी, ठाड़ी, लक्ष्मीपुर, पूर्णियां तथा बौड़िया पंचायत के बौड़िया गांव में सब्जी, खासकर फूलगोभी की खेती ने अलग पहचान बनाई है. इन गांवों के किसान फूलगोभी के साथ बंदगोभी और ब्रोकली की भी खेती करते हैं, लेकिन क्षेत्र की मुख्य पहचान फूलगोभी उत्पादन से ही है. खसिया और आसपास के गांवों में किसान साल के नौ-दस महीने फूलगोभी की खेती करते हैं. मई में शुरू होने वाली इसकी खेती करीब 70 से 80 दिनों में कटाई और बिक्री के लिए तैयार हो जाती है. ऑफ सीजन में भी इस इलाके में 300 एकड़ से अधिक जमीन पर फूलगोभी की खेती की जाती है.

अच्छी फसल में डेढ़ से दो लाख तक की आमदनी

खसिया के फूलगोभी उत्पादक किसान रामानंद महतो बताते हैं कि फूलगोभी बेहद नाजुक फसल है और इसके लिए अनुकूल मौसम जरूरी है. इसकी खेती में लागत भी काफी आती है. फूलगोभी के बीज की कीमत ही करीब 22 हजार से 70 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक है. खाद, बीज, जुताई, मजदूरी समेत अन्य खर्च मिलाकर एक एकड़ में करीब 20 हजार रुपये की लागत आती है. मौसम अनुकूल रहने और फसल अच्छी होने पर एक एकड़ में करीब डेढ़ से दो लाख रुपये की फसल तैयार हो जाती है. लेकिन मौसम प्रतिकूल होने पर किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है.

खेत में पानी जमा होते ही गलने लगती है फसल

किसान लीलाधर महतो के अनुसार फूलगोभी को बहुत अधिक पानी की जरूरत नहीं होती. खेत में पानी जमा होने लगे तो फसल बर्बाद होने लगती है. इस वर्ष अगस्त के अंतिम दिनों और सितंबर के पहले सप्ताह में हुई लगातार बारिश ने क्षेत्र के फूलगोभी उत्पादकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

अतिवृष्टि के कारण खेतों में पानी जमा हो गया है. कई जगह पानी का सोता भी फूट पड़ा है. इससे फूलगोभी के पौधों के पत्ते मुरझाकर पीले पड़ने के बाद गिरने लगे हैं. खेतों में अधिक पानी के कारण पौधों की जड़ें गल गई हैं और बड़ी संख्या में पौधे मरने लगे हैं.

तैयार फूलगोभी भी गलने लगी, किसानों को दोहरी मार

जिन पौधों में फूल आ चुका है या फूलगोभी कटाई के लिए लगभग तैयार हो गई है, उनमें भी गलन शुरू हो गई है. इससे किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है. खेत में लगी फसल के साथ-साथ नर्सरी में तैयार किए गए पौधे भी बर्बाद हो रहे हैं. ऐसे में किसानों के सामने न केवल तैयार फसल बचाने की चुनौती है, बल्कि अगली फसल के लिए तैयार पौधों को बचाना भी मुश्किल हो गया है.

दूर-दूर तक है खसिया की फूलगोभी की मांग

बेहतर गुणवत्ता और अच्छे स्वाद के कारण खसिया और आसपास के गांवों में तैयार फूलगोभी की मांग दूर-दराज के बाजारों तक है. स्थानीय हाट-बाजारों के अलावा दुमका, देवघर, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, मधुपुर, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, भागलपुर, बांका, सिउड़ी और बर्द्धमान की सब्जी मंडियों में भी यहां की फूलगोभी की अच्छी मांग रहती है.

बाहरी सब्जी व्यापारी खेतों से ही फूलगोभी खरीदकर ले जाते हैं. इससे किसानों को परिवहन और मंडी के अतिरिक्त खर्च से भी राहत मिलती है और अच्छी आय की उम्मीद रहती है. लेकिन इस बार भारी बारिश ने किसानों की पूरी गणित बिगाड़ दी है. हालात ऐसे हैं कि किसानों के लिए खेती में लगी लागत की वसूली करना भी मुश्किल नजर आ रहा है.

उन्नत प्रभेद भी नहीं बचा सके फसल

क्षेत्र के किसानों ने इस वर्ष भी पिछले वर्षों की तरह सेमिनिस के 4051, एडवांटा के अबीरा, सन ग्रो, आनंद सीड्स के गजनी और रॉकस्टार जैसे उन्नत प्रभेदों की खेती की थी. इन प्रभेदों से किसानों को हर वर्ष अच्छा उत्पादन मिलता रहा है. लेकिन इस बार अत्यधिक बारिश के कारण इन उन्नत प्रभेदों के पौधे भी खेतों में सड़ने और मरने लगे हैं.

सरकारी मदद की आस, अब तक नहीं हुआ नुकसान का आकलन

किसानों का कहना है कि वे अपने कठिन परिश्रम के बल पर हर वर्ष फूलगोभी की खेती करते हैं, लेकिन सरकार के उद्यान विभाग या कृषि विभाग की ओर से उन्हें विशेष सहायता नहीं मिलती. इस वर्ष अतिवृष्टि से बड़े पैमाने पर फसल प्रभावित होने के बावजूद किसानों के नुकसान का आकलन करने के लिए अब तक किसी विभागीय टीम के गठन की जानकारी नहीं है.

किसानों का आरोप है कि उन्हें हुए नुकसान की भरपाई के लिए विभागीय स्तर पर या प्रशासन की ओर से भी अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है. ऐसे में भारी नुकसान झेल चुके किसानों को अब सरकार से मुआवजे की उम्मीद है.

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By Prabhat khabar news desk

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