बासुकिनाथ : राजकीय श्रावणी मेला महोत्सव 2026 के समापन अवसर पर श्रावणी पूर्णिमा के पावन दिन शुक्रवार को बाबा फौजदारीनाथ के दरबार में आस्था और विश्वास का सैलाब उमड़ पड़ा. मंदिर प्रबंधन के अनुसार 65,725 कांवरियों ने बाबा फौजदारीनाथ की स्पर्श पूजा कर मंगलकामना की. अहले सुबह पुरोहित पूजा और सरकारी पूजा संपन्न होने के बाद गर्भगृह में जलार्पण शुरू हुआ, जो देर तक जारी रहा.
हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा बासुकिनाथ
बाबा के दर्शन और जलार्पण के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही. हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरी भोलेनाथ की नगरी गुंजायमान रही. बासुकिनाथ धाम पूरी तरह केसरिया रंग में सराबोर नजर आया. मंदिर प्रांगण, शिवगंगा घाट और मेला परिसर कांवरियों से पटा रहा.
श्रद्धालुओं ने बाबा फौजदारीनाथ को जल अर्पित कर पुण्य के भागी बने और रक्षा सूत्र बांधकर सुख, शांति व समृद्धि की कामना की. पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना करायी.
कतार को व्यवस्थित करने में जुटा रहा प्रशासन
पूर्णिमा की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पहले से व्यापक व्यवस्था कर रखी थी. मंदिर प्रांगण में तैनात अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने कांवरियों की कतार को व्यवस्थित रखते हुए श्रद्धालुओं को सुगमतापूर्वक गर्भगृह तक पहुंचाया.
कांवरियों की कतार संस्कार मंडप, फलाहारी धर्मशाला, क्यू कॉम्पलेक्स, शिवगंगा पिड और कुशवाहा धर्मशाला तक पहुंच गयी थी. श्रद्धालुओं की सेवा में स्वयंसेवी संस्थाओं के शिवभक्त भी जुटे रहे. जगह-जगह कांवरियों को पानी पिलाने की व्यवस्था की गयी थी.
11,463 श्रद्धालुओं ने किया इंटरनेट जलार्पण
मंदिर संकीर्तनशाला के समीप स्थित जलार्पण काउंटर पर 11,463 श्रद्धालुओं ने जलार्पण किया. यहां पाइप के माध्यम से जल सीधे गर्भगृह में शिवलिंग पर अर्पित होता है. श्रद्धालु इसे इंटरनेट जलार्पण कहते हैं.
काउंटर पर लगे आठ एलईडी टीवी पर गर्भगृह में जलार्पण का लाइव दर्शन कराया जाता है. यह सुविधा विशेष रूप से वैसे कांवरियों के लिए है, जो कांवरिया शेड की लंबी कतार में नहीं लगना चाहते.
शिवगंगा में स्नान को लेकर एनडीआरएफ अलर्ट
शिवगंगा घाट पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. कांवरियों ने आस्था की डुबकी लगाकर स्नान किया और इसके बाद बाबा फौजदारीनाथ के जलार्पण के लिए कतारबद्ध हुए.
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर एनडीआरएफ की टीम पूरे अलर्ट मोड में रही. मोटर बोट के माध्यम से शिवगंगा में स्नान कर रहे श्रद्धालुओं की निगरानी की गयी. स्नान के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए सुरक्षा कर्मियों को विशेष रूप से तैनात रखा गया था.
दान और स्नान से पुण्य की मान्यता
सनातन धर्म में श्रावणी पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. मान्यता है कि इस पावन तिथि पर दान-पुण्य करने तथा नदी या पवित्र सरोवर में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इसी मान्यता के तहत श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में ब्राह्मणों को दान-पुण्य किया.
सूर्योदय से पूर्व महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने शिवगंगा समेत आसपास के नदी-तालाबों में स्नान कर अपने आराध्य देव की स्तुति की और मोक्ष की मंगलकामना की. श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी पूजा-अर्चना की.
पूरे दिन बासुकिनाथ धाम में भक्ति, आस्था और श्रद्धा का माहौल बना रहा.
