दुमका : दुमका के जिला परिवहन पदाधिकारी के लॉग इन को हैक कर बड़े पैमाने पर फर्जी कार्रवाई की गयी है तथा परिवहन विभाग के राजस्व को भी नुकसान पहुंचाया गया है. यह मामला उस समय पकड़ में आया, जब डीटीओ विद्याभूषण कुमार के इमेल आइडी पर उनके विभागीय एप्लीकेशन के लॉग इन में प्रवेश की फोर्स इंट्री के नोटिफिकेशंस सात व आठ मार्च 2018 को लगातार मिलने लगे.
डीटीओ का लॉग इन हैक कर 38 वाहनों का कर दिया ऑनरशिप ट्रांसफर और कर्ज मुक्ति
दुमका : दुमका के जिला परिवहन पदाधिकारी के लॉग इन को हैक कर बड़े पैमाने पर फर्जी कार्रवाई की गयी है तथा परिवहन विभाग के राजस्व को भी नुकसान पहुंचाया गया है. यह मामला उस समय पकड़ में आया, जब डीटीओ विद्याभूषण कुमार के इमेल आइडी पर उनके विभागीय एप्लीकेशन के लॉग इन में प्रवेश […]

इस पर उन्हें शक हुआ, तो उन्होंने जांच करायी. प्रारंभिक जांच में पाया गया कि महीने भर में ही इस लॉग इन को हैक कर किसी अनधिकृत शख्स ने 38 बार वाहनों के स्वामित्व का स्थानांतरण (ट्रांसफर ऑफ ऑनरशिप) तथा दृष्टिबंधक समाप्ति (हाइपोथिकेशन टर्मिनेशन) जैसी कार्रवाई फर्जी तरीके से कर दी है. इस लॉग इन में एक्सेस कर इन कार्यों को अनुमोदित किया गया. यह 38 फर्जी कार्रवाई 11 नवंबर 2017 से लेकर 16 दिसंबर 2017 की ही अवधि में हुए हैं.
गहन जांच हुई, तो होगा बड़ा खुलासा : मामले की गहन जांच होने पर परिवहन विभाग में बड़े पैमाने पर की गयी गड़बड़ी का खुलासा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. विभागीय स्तर पर 11 नवंबर 2017 से लेकर 16 दिसंबर 2017 की अवधि में दुमका डीटीओ के लॉग इन को एक्सेस करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कई तरह के साक्ष्य जमा किये गये हैं.
मुख्यालय को लिखा : एडीओ राकेश कुमार ने जिला परिवहन पदाधिकारी के लॉग इन में साइबर सेंधमारी होने की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि मार्च के पहले सप्ताह में डीटीओ को लॉग इन को हैक करने को लेकर नोटिफिकेशंस आया था. जिसके बाद उन्होंने इसे ब्लॉक किया था. यह नोटिफिकेशंस लॉग इन में फोर्सफुली इंटर करने से संबंधित था. तब इस मामले में डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेटिक सेंटर के टेक्निकल सेल की मदद ली गयी.
नवंबर-दिसंबर के बीच के एक महीने में नमूने के तैर पर जांच करायी गयी, तो पाया गया कि किसी अन्य आइपी से काम किया गया है व काम करके कुछ गलत कार्रवाई की गयी है. एसडीओ ने बताया कि अभी इस मामले में आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य एकत्रित कर विस्तृत जांच करने के लिए एनआइसी के पदाधिकारी को लिखा गया है तथा विभागीय प्रधान और परिवहन विभाग के तकनीकी पदाधिकारी को सूचना दी गयी है.