दुमका से आनंद जायसवाल की रिपोर्ट
Dumka News: दुमका से एक राहत भरी खबर सामने आई है. संताल परगना प्रमंडल के केंदू पत्ती संग्रहकर्ताओं के लिए वर्ष 2026 को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया है. प्रमंडलीय आयुक्त संजय कुमार की अध्यक्षता में आयोजित केंदू पत्ती सलाहकार समिति की बैठक में संग्रहण दर बढ़ाने पर सहमति बनी. इस फैसले से हजारों मजदूरों और वनाधारित आजीविका से जुड़े लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.
पुरानी दर से नहीं हो रहा था गुजारा
बैठक के दौरान अधिकारियों और समिति सदस्यों ने मौजूदा परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा की. समीक्षा में सामने आया कि अब तक केंदू पत्ती का संग्रहण दर 1883 रुपये प्रति मानक बोरा निर्धारित था. लेकिन बढ़ती महंगाई, मजदूरी दर और अन्य खर्चों में लगातार वृद्धि के कारण यह दर पर्याप्त नहीं रह गई थी. संग्रहकर्ताओं के लिए इस दर पर काम करना मुश्किल होता जा रहा था.
अब 2014 रुपये प्रति बोरा मिलेगा भुगतान
विस्तृत विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि वर्ष 2026 के लिए केंदू पत्ती संग्रहण की दर बढ़ाकर 2014 रुपये प्रति मानक बोरा कर दी जाए. यह नई दर सरकारी और रैयती दोनों प्रकार की जमीनों पर लागू होगी. दर में इस वृद्धि को संग्रहकर्ताओं के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है.
हजारों परिवारों को होगा सीधा फायदा
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन हजारों परिवारों पर पड़ेगा, जिनकी आजीविका केंदू पत्ती संग्रहण पर निर्भर है. दर बढ़ने से उनकी आय में सीधी बढ़ोतरी होगी, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आने की संभावना है. ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मजदूरों के लिए यह निर्णय आर्थिक संबल प्रदान करेगा.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
केंदू पत्ती संग्रहण संताल परगना क्षेत्र में रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्रोत है. दर बढ़ने से न केवल मजदूरों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि इससे पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र को मजबूती मिलेगी. स्थानीय बाजारों में क्रय शक्ति बढ़ेगी और छोटे व्यवसायों को भी लाभ मिलेगा.
रोजगार के अवसर होंगे और मजबूत
इस निर्णय से केंदू पत्ती से जुड़े रोजगार के अवसर भी और सुदृढ़ होंगे. बेहतर भुगतान मिलने से अधिक लोग इस कार्य में जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे. इससे वन आधारित रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और पलायन जैसी समस्याओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है.
सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा निर्णय
संताल परगना में इस फैसले को एक सकारात्मक और दूरदर्शी पहल के रूप में देखा जा रहा है. यह न केवल मजदूरों के हित में है, बल्कि वन आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है. सरकार और प्रशासन के इस कदम से यह संदेश गया है कि श्रमिकों के हितों को प्राथमिकता दी जा रही है.
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भविष्य में और सुधार की उम्मीद
हालांकि दर में वृद्धि से राहत जरूर मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर दरों की समीक्षा जरूरी है, ताकि मजदूरों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलता रहे. फिलहाल, 2026 के लिए लिया गया यह निर्णय संग्रहकर्ताओं के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आया है.
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