20 लाख की इंसीनिरेटर कबाड़ में तब्दील

दुमका नगर : उपराजधानी के सदर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण परिसर में लगा इंसीनिरेटर कबाड़ में तब्दील हो गया है. अस्पताल के बायोमेडिकल कचरे के निष्पादन के लिए तकरीबन एक दशक पहले इसे स्थापित की गयी थी. करीब 20 लाख रुपये की लागत से मशीन लगायी गयी थी. जिस कंपनी ने लगायी थी. […]

दुमका नगर : उपराजधानी के सदर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण परिसर में लगा इंसीनिरेटर कबाड़ में तब्दील हो गया है. अस्पताल के बायोमेडिकल कचरे के निष्पादन के लिए तकरीबन एक दशक पहले इसे स्थापित की गयी थी. करीब 20 लाख रुपये की लागत से मशीन लगायी गयी थी. जिस कंपनी ने लगायी थी.

उसके द्वारा ट्रायल किये जाने और दो-चार बार उपयोग के बाद से ही यह इंसीनिरेटर बंद है. पहले बिजली की समस्या आयी, फिर दूसरे कई कारण बने. सबकुछ निदान हुआ तो इंसीनिरेटर ही उपयोग करना बंद कर दिया गया. विभागीय उदासीनता के कारण लंबे समय से यूं ही पड़े रहने से अब यह चालू हो भी पायेगा या नहीं, यह कहने वाला कोई नहीं है.

अगर यह इंसीनिरेटर उपयोग में लाया जाता, तो शहर में चल रहे सभी नर्सिंग होम व निजी क्लिनिकों के भी बायोमेडिकल कचड़े को निर्धारित शुल्क लेकर इसी मशीन से जलाकर निष्पादित किया जाता.

कहने को शॉकपीट, लगा रहे कचरे का अंबार : मशीन का इस्तेमाल नहीं होने के कारण बॉयोमेडिकल कचरे को परिसर के आस-पास गाड़ या फेंक दिया जाता है. फेंके गये बॉयो मेडिकल कचरे की वजह से मरीजों के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मी, सफाईकर्मी व आने-जाने वाले लोगों को हमेशा संक्रमण का खतरा बना रहता है. ऐसे में मरीज और बीमार हो जायेंगे.
अब तकनीशियन का रोना रो रहा प्रबंधन
सदर अस्पताल परिसर में लगे इंसीनिरेटर को चलाने के लिए अब सदर अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य महकमा तकनीशियन का रोना रो रहा है. सफाईकर्मी मशीन को चलाने का जिम्मा सौंप दिया गया है. विद्युत संचालित इस मशीन को चलाने की जानकारी नहीं रहने के कारण सफाई कर्मी इस मशीन को चलाने से कतराते हैं.
अब तकनीशियन का रोना रो रहा प्रबंधन
सदर अस्पताल परिसर में लगे इंसीनिरेटर को चलाने के लिए अब सदर अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य महकमा तकनीशियन का रोना रो रहा है. सफाईकर्मी मशीन को चलाने का जिम्मा सौंप दिया गया है. विद्युत संचालित इस मशीन को चलाने की जानकारी नहीं रहने के कारण सफाई कर्मी इस मशीन को चलाने से कतराते हैं.
इंसीनिरेटर मशीन लंबे समय से बंद पड़ी है. मशीन अगर चलने की स्थिति में है, तो चालू कराया जायेगा. आसपास में फैले कचरे को हटाने का निर्देश दिया जायेगा. कार्यशैली में सुधार किया जायेगा, ताकि किसी को किसी प्रकार की परेशानी न हो.
डाॅ सुरेश कुमार, सिविल सर्जन

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >