जीवितपुत्रिका व्रत कल, बाजार में खरीदारी के लिए लगी रही भीड़
बासुकिनाथ : संतान की लंबी आयु के लिए महिलाएं अखंड उपवास में रहकर जीवितपुत्रिका (जिउतिया) व्रत करती हैं. बुधवार को जीवितपुत्रिका व्रत है. मंगलवार को नहाय खाय होगा. महिलाएं अखंड उपवास में माता के समक्ष डलिया सजाकर पूजा अर्चना करती हैं. पितृ भगवान को नदी एवं तालाब में तर्पण कर उन्हें धरती पर आमंत्रित करती हैं. उन्हें तर्पण कर तृप्त कर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं. व्रत करने से संतान की सभी बाधाएं दूर होती है. पौराणिक कथा के अनुसार चिल्ही एवं सियारिन पर जिउतिया पर्व आधारित है. चिल्ही एवं सियारिन ने यह व्रत किया था. सियारिन ने भूख लगने पर व्रत का नियम तोड़ दिया,
लेकिन चिल्ही ने पूरे नेम निष्ठा के साथ इस व्रत को पूरा किया. कालांतर में दोनों अयोध्या के एक व्यापारी के यहां सगी बहन के रूप में जन्म लिया. परिणामस्वरूप बड़ी बहन सियारिन की एक भी संतान नहीं बची, लेकिन छोटी बहन चिल्ही का सभी संतान यशस्वी हुआ. निराश होकर बड़ी बहन मुनि के पास गये. पूर्व जन्म में हुए पाप के कारण बता कर दुबारा नेम निष्ठा के साथ जिउतिया व्रत करने की बात कही. ऐसा करने से उसके घर में भी खुशियां लौट आयी. तभी से इस व्रत को करने की परंपरा शुरू हुई है.
