नीरज अंबष्ट की रिपोर्ट
धनबाद: सगीर हसन सिद्दीकी के हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे गैंगस्टर फहीम खान को रिहा करने के झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी और हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है.
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने राज्य सरकार के वकील जयंत मोहन और फहीम खान के वरिष्ठ वकील अजीत कुमार सिन्हा की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए सरकार की अपील को खारिज कर दिया है.
हाईकोर्ट का फैसला
7 नवंबर 2025 को झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की एकलपीठ ने फहीम खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह के अंदर उन्हें जेल से रिहा करने का निर्देश दिया था. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि रिहाई संबंधी समीक्षा बोर्ड ने 2007 की संशोधित रिमिशन नीति को आधार बनाकर फहीम की रिहाई से इनकार किया था, जो गलत है.
कोर्ट ने कहा कि सगीर हत्याकांड का फैसला सत्र न्यायालय ने 15 जून 1991 को सुनाया था, इसलिए फहीम खान पर 1984 वाली रिहाई नीति लागू होनी चाहिए, न कि 2007 वाली. समयसीमा बीतने के बावजूद सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया, जिसके बाद फहीम खान ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की.
इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद झारखंड सरकार अब सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है.
क्या था मामला?
10 मई 1989 को वासेपुर में सगीर हसन सिद्दीकी की हत्या हुई थी. वर्ष 2009 में झारखंड हाईकोर्ट ने फहीम खान को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. 21 अप्रैल 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा था.
अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के साथ फहीम खान की रिहाई की राह साफ हो गई है. यह मामला झारखंड की जेल रिमिशन नीति और पुरानी सजाओं पर नए नियमों के लागू होने को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
