आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त दवा के लिए करनी पड़ती है भाग-दौड़

SNMMCH Dhanbad News: धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेटडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों को दवा के लिए काफी भाग-दौड़ करनी पड़ती है. डॉक्टर दवा लिख देते हैं, तो पहले अप्रूवल कराना होता है. फिर पर्ची लेकर आधा किलोमीटर दूर स्टीलगेट जाकर एजेंसी की दुकान से देवा लेनी पड़ती है.

SNMMCH Dhanbad News| धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) में आयुष्मान भारत योजना का लाभ लेने के लिए मरीज व उनके परिजनों को काफी भाग-दौड़ लगानी पड़ रही है. इस योजना के तहत अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों को नि:शुल्क दवा व अन्य चिकित्सीय उपकरण उपलब्ध कराना है. मरीजों को दवा समेत अन्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने एक एजेंसी तिरुपति इंटरप्राइजेज से करार किया है. व्यवस्था ऐसी है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को आधा किमी दूर स्टीलगेट स्थित उक्त एजेंसी की दुकान में जाकर दवा लेनी पड़ती है. अस्पताल में भर्ती वैसे मरीज, जिनके साथ उनके परिजन नहीं है, वे दवा नहीं ला पाते. इस व्यवस्था में ऐसे मरीज सबसे ज्यादा परेशान हैं.

डॉक्टर द्वारा पर्ची पर दवा लिखने के बाद शुरू होती है भाग-दौड़

एसएनएमएमसीएच में आयुष्मान भारत योजना के तहत नि:शुल्क दवा प्राप्त की प्रक्रिया डॉक्टर द्वारा पर्ची पर दवाएं लिखने के साथ शुरू होती है. पर्ची मिलने के बाद मरीज के परिजनों की भागदौड़ शुरू हो जाती है. आयुष्मान के मरीजों को मिलने वाली नि:शुल्क दवा की अलग पर्ची है. पर्ची पर दवा लिखने के बाद मरीज के परिजनों को अस्पताल परिसर में बने आयुष्मान सहायता केंद्र जाकर उसे अप्रूव कराना पड़ता है. इसके बाद मरीज के परिजनों को अप्रूवल पर्ची लेकर स्टीलगेट के कुंती मार्केट स्थित उक्त एजेंसी की दुकान में जाना पड़ता है. यहीं निबंधित मरीजों को नि:शुल्क दवा दी जाती है.

  • डॉक्टर के दवा लिखने के बाद पहले कराना पड़ता है अप्रूव, फिर पर्ची लेकर आधा किमी दूर स्टीलगेट जाकर एजेंसी की दुकान से लेनी पड़ती है दवा
  • दवा नहीं मिली, तो बाहर से खरीदने को विवश हैं परिजन, अकेले इलाज कराने आने वाले मरीज इस व्यवस्था से हैं सबसे ज्यादा परेशान

दुकान में हमेशा रहती हैं दवा की कमी

आयुष्मान भारत योजना के तहत स्टीलगेट स्थित निबंधित दवा दुकान में जाने पर भी मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है. यहां पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं रहने पर मरीजों को कुछ दवा देकर लौटा दिया जाता है. शेष दवा उन्हें बाहर से खरीदने को कहा जाता है. ज्ञात हो कि अस्पताल के कैथलैब में आयुष्मान योजना के तहत कैंसर के एक मरीज को भर्ती किया गया था. यहां चार दिन अस्पताल में उनका इलाज चला. इस दौरान रोज चिकित्सकों ने अलग-अलग तरह की दवाएं लिखीं. स्टीलगेट स्थित निबंधित केंद्र जाने पर डॉक्टरों की लिखी कई दवाएं उन्हें नहीं मिली. ऐसे में मरीज के परिजनों को बाहर से दवा खरीदने को विवश होना पड़ा. यही हाल अन्य मरीजों का भी है.

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क्या है नियम

आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल में भर्ती मरीजों को दवा समेत सभी तरह की सुविधाएं अस्पताल में ही मुहैया करानी है. दवा उपलब्ध कराने के लिए अगर एजेंसी का चयन किया गया है, तो उसे अस्पताल परिसर में ही केंद्र का संचालन करना है. ताकि जरूरतमंद मरीज को आसानी से नि:शुल्क दवा मिल सके.

अमृत भारत दवा काउंटर खुलते ही खत्म होगी समस्या : अधीक्षक

अस्पताल के अधीक्षक डॉ डीके गिंदौरिया ने कहा कि दवा के लिए आयुष्मान से निबंधित मरीजों को हो रही परेशानी की जानकारी है. इसे दूर करने के लिए अस्पताल में अमृत भारत योजना के तहत मेडिकल स्टोर खोलने की योजना है. इसके लिए राज्य सरकार द्वारा चयनित एजेंसी को अस्पताल परिसर में जगह दिलायी जा चुकी है. दवा काउंटर के शुरू होते ही इस केंद्र से दवा मिलने लगेगी.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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