धनबाद जिले में कीटनाशक विक्रेताओं पर कृषि विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. थोक, खुदरा विक्रेताओं और वितरकों को कीटनाशी अधिनियम-1968 एवं कीटनाशी नियमावली-1971 का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है.
जारी विभागीय नोटिस के अनुसार बिना वैध अनुज्ञप्ति के कीटनाशकों का निर्माण, भंडारण, बिक्री अथवा वितरण को अपराध करार दिया गया है. जून 2026 में भी जिला कृषि विभाग ने बीज, खाद और कीटनाशक विक्रेताओं को बिना लाइसेंस कारोबार नहीं करने की चेतावनी दी थी.
हर दुकान के पास होना चाहिए वैध लाइसेंस
कीटनाशक कारोबार के लिए अनुज्ञप्ति के साथ निर्माता कंपनी का अधिकृत प्रमाण पत्र रखना अनिवार्य है. विक्रेता को सही लेबल, पैकिंग और सूचना पत्र के साथ ही उत्पाद बेचने होंगे. प्रतिबंधित और अपंजीकृत कीटनाशकों की बिक्री या भंडारण पर भी कार्रवाई होगी.
एक्सपायर्ड दवा मिली तो होगी कार्रवाई
विभाग ने एक्सपायर्ड कीटनाशकों की बिक्री पर रोक लगायी है. ऐसे उत्पादों को बिक्री योग्य स्टॉक से अलग स्थान पर रखना होगा और उस पर ''एक्सपायर्ड'' का स्पष्ट लेबल लगाना होगा. साथ ही भंडार पंजी, नकद अथवा उधार बिक्री का हिसाब और अन्य अभिलेख निर्धारित प्रारूप में रखना होगा.
हर महीने देना होगा बिक्री का ब्योरा
विक्रेताओं को प्रत्येक माह विहित प्रपत्र में कीटनाशक बिक्री का विवरण अनुज्ञापन अधिकारी को देना होगा. निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को आवश्यक अभिलेख और नमूने उपलब्ध कराना भी जरूरी है. खाद्य सामग्री से कीटनाशकों को दूर रखने के लिए भंडारण और परिवहन में भी विशेष सावधानी बरतनी होगी.
लाइसेंस रद्द होने के साथ जेल तक का प्रावधान
नियमों का उल्लंघन होने पर अनुज्ञप्ति रद्द करने, जुर्माना और कारावास अथवा दोनों की कार्रवाई संभव है. विभाग ने विक्रेताओं से अपने लाइसेंस और दस्तावेज दुरुस्त रखने तथा नियमों का पालन करने की अपील की है. जिले में कुल कितनी कीटनाशक दुकानें पंजीकृत हैं और इनमें कितनों के पास वर्तमान में वैध लाइसेंस है, इसका आंकड़ा विभागीय स्तर से सामने आने पर कार्रवाई की तस्वीर और स्पष्ट होगी.
