देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट का रास्ता साफ, बैठक के बाद खत्म हुआ ग्रामीणों का विरोध

देश की सबसे बड़ी 1200 करोड़ की फ्लोटिंग सौर ऊर्जा परियोजना का मार्ग प्रशस्त हो गया है. स्थानीय प्रशासन, DVC और ग्रामीणों के बीच बैठक में सभी मुद्दे सुलझ गए, जिससे विरोध समाप्त हो गया है. परियोजना से स्थानीय लोगों को रोजगार और गांवों के विकास का आश्वासन दिया गया है.

प्रतिनिधि, मैथन (निरसा/धनबाद)

डीवीसी की बहुप्रतीक्षित और देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग (तैरती) सौर ऊर्जा परियोजना के निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है. पश्चिम बंगाल के सीधाबाड़ी स्थित डीवीसी कम्युनिटी हॉल में स्थानीय प्रशासन, डीवीसी अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक में सभी प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन गई. इसके साथ ही परियोजना को लेकर चल रहा विरोध समाप्त हो गया है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किए जाने की तैयारी है.

1,200 करोड़ की लागत, 234 मेगावाट होगी क्षमता

डीवीसी की यह अत्याधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परियोजना करीब 1,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगी. इसकी 234 मेगावाट उत्पादन क्षमता होगी. अगले दो वर्षों में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद परियोजना से हर वर्ष करीब 50 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन होगा.

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ग्रामीणों की शंकाओं का किया गया समाधान

बैठक में डीवीसी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि फ्लोटिंग सोलर परियोजना जलाशय के किनारे से करीब तीन किलोमीटर दूर पानी के मध्य भाग में स्थापित की जाएगी. इससे मछली पकड़ने और नाव संचालन जैसी पारंपरिक आजीविकाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा. मछुआरों और नाव चालकों की चिंताओं पर अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि परियोजना के कारण उनके रोजगार पर कोई संकट नहीं आएगा और जलाशय में उनकी गतिविधियां पहले की तरह जारी रहेंगी.

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

डीवीसी ने आश्वासन दिया कि परियोजना में अकुशल श्रमिकों से जुड़े कार्यों में 100 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाएगा. वहीं, स्थानीय युवक-युवतियों को उनकी योग्यता और कौशल के अनुसार विभिन्न कार्यों में अवसर उपलब्ध कराया जाएगा.

सीएसआर से होंगे विकास कार्य

डीवीसी ने अपने सीएसआर फंड के माध्यम से आसपास के गांवों में पक्की सड़क, स्ट्रीट लाइट, श्मशान घाट और कम्युनिटी हॉल जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास का भी भरोसा दिया. बैठक के दौरान ग्रामीणों ने मैथन क्षेत्र के सभी गांवों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई. इस पर डीवीसी अधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार इस संबंध में नीतिगत निर्णय लेती है, तो इस दिशा में सकारात्मक पहल की जाएगी.

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जुलाई में हुआ था विरोध

गौरतलब है कि जुलाई में जब डीवीसी परियोजना स्थल पर मशीनरी लेकर पहुंची थी, तब पुराने विस्थापन, अधूरे वादों और मुआवजे के मुद्दों को लेकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था. इसके बाद 14 जुलाई को कालीपत्थर मैदान में वास्तुहारा संग्राम समिति के नेतृत्व में बड़ी बैठक भी हुई थी.

लगातार संवाद और स्थानीय प्रशासन की पहल के बाद अब त्रिपक्षीय बैठक में सहमति बनने से परियोजना के निर्माण की सभी प्रमुख बाधाएं दूर हो गई हैं. इससे मैथन क्षेत्र में इस महत्वाकांक्षी हरित ऊर्जा परियोजना का कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है.


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By अमलेश नंदन सिन्हा

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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