Dhanbad News : जमीन विवाद मामले में अदालती चक्कर से पहले सीओ व एसडीओ के यहां करें शिकायत

प्रभात खबर काउंसेलिंग में सबसे अधिक प्रोपर्टी विवाद के मामले आये

खरीदी गयी जमीन का 50 साल पहले दाखिल खारिज हो चुका है, इसके बाद भी उसपर कोई दावा कर रहा है, तो पहले देखें कि उसका दावा कितना सही है. अगर रिकॉर्ड में उसके दावा की पुष्टि नहीं होती है, तो मामले की शिकायत थाना से करें. साथ ही सीओ व एसडीओ से शिकायत करें. इसके बाद भी समाधान नहीं होता है, तो केस दर्ज करायें. यह कहना है धनबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता सत्येंद्र राम का. वह रविवार को प्रभात खबर के ऑनलाइन लीगल काउंसेलिंग में पाठकों के सवाल का जवाब दे रहे थे. काउंसेलिंग में सबसे अधिक प्रोपर्टी से जुड़े विवाद से संबंधित सवाल पूछे गये.

तोपचांची से सुखदेव राम का सवाल :

गोमो के एक शो रूम से बाइक की खरीदी थी. पीएनबी से लोन हुआ था. हर माह उसका किस्त भी चुका दिया. एनओसी भी मिल गयी. बावजूद इसके दूसरा बैंक गाड़ी का लोन बाकी होने की बात कह रहा है. शोरूम वाले ने वाहन खरीदते वक्त दो कागजात पर हस्ताक्षर लिया था. अब क्या करना उचित रहेगा ?

अधिवक्ता की सलाह

: शोरूम वाले से मिल कर मामले की जानकारी दे. एक ही वाहन का दो लोन कैसे हो सकता है. इसकी शिकायत शोरूम के जिम्मेवार व्यक्ति से करें. इसके बाद भी पहल नहीं होती है, तो स्थानीय थाना में मामले की लिखित शिकायत करें. थाना शिकायत नहीं लेता है, तो ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें.

कतरास से राजेश कुमार ठाकुर का सवाल: जमीन का अधिग्रहण सरकार ने किया है. लेकिन अभी तक मुआवजा नहीं मिल पाया है. जमीन को छोड़ना सही रहेगा या नहीं.

अधिवक्ता की सलाह :

अधिग्रहण की प्रक्रिया कानूनी होती है. अधिग्रहण कर लिया गया है, तो मुआवजा मिल जायेगा. अगर विलंब हो रहा है, तो सीओ से मिल कर इसकी जानकारी दें. कोशिश करें, जब तक मुआवजा नहीं मिल जाता है, तब तक जमीन पर कब्जा रखें.

कतरास से नीताई चंद्र रवानी का सवाल :

1938 में जमीन दान में मिली थी. अब इस पर दूसरे ने दावा किया है. मामले को लेकर 2017 में टाइटल शूट फाइल किया. लेकिन वह लोग जवाब दाखिल नहीं कर कहे हैं. इस स्थिति में आगे क्या करना सही होगा?

अधिवक्ता की सलाह :

न्यायालय में मामला चल रहा है और डब्ल्यूएस जमा नहीं किया गया है, तो आपके पक्ष में ऑर्डर आ सकता है. इसके लिए अपने अधिवक्ता से आगे की प्रक्रिया कराने को कहें.

गिरिडीह से पंकज कुमार का सवाल :

परिचित ने नौकरी लगाने के लिए 23 लाख रुपये लिए थे. लेकिन नौकरी नहीं हुई. पैसे वापस मांगने पर नहीं लौटा रहा है, कोई लिखित करार नहीं है. लेकिन पैसे लेने के बदले उसने चेक दिया है. बैंक के चेक में उसने फर्जी हस्ताक्षर कर दिया है. अब वह घर छोड़ कर भी कहीं भागा हुआ है. क्या करना उचित होगा ?

अधिवक्ता का जवाब :

उसने बैंक का चेक दिया है, इस आधार पर केस बनता है. हस्ताक्षर सही है या गलत यह बाद में देखा जायेगा. कोई गवाह है, तो उसके आधार पर या फिर चेक के आधार पर कोर्ट से नोटिस जारी करायें. उसके खिलाफ कानूनी सलाह पर आगे बढ़े.

हीरोडीह से अनिल कुमार का सवाल :

मारपीट के प्राथमिकी में बहन का झूठा नाम डाल दिया गया है. बेल लेना जरूरी है. इस मामले में उचित क्या होगा?

अधिवक्ता की सलाह :

पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दें कि बहन का झूठा नाम डाला गया है. पुलिस मामले की जांच करेगी. आपका दावा सही मिलने पर केस डायरी में उनका नाम हटा दिया जायेगा. ऐसे में बेल लेने की कोई जरूरत नहीं है.

खेशमी गोमो से दयाल ठाकुर का सवाल : खेशमी में परिवार 100 सालों से रह रहा है. रास्ते के बगल से नाली बहती है. लेकिन अब कुछ लोगों ने रास्ते को बंद कर दिया है. इससे पानी बहने में दिक्कत आ रही है, जबकि वह सरकारी जमीन है ?

अधिवक्ता की सलाह :

कोशिश करें कि आपसी रजामंदी से कोई समाधान निकल जाये. समाधान नहीं होता है, तो थाना में शिकायत करें और कार्रवाई की मांग रखे.

गिरिडीह से नीरज कुमार का सवाल :

मैं निजी विद्यालय में शिक्षक हूं, पत्नी पुलिस में है. वह मायके में रहती है. हमारी एक बेटी भी है. मैं साथ में रहना चाहता हूं, लेकिन पत्नी साथ में नहीं रहना चाहती है ?

अधिवक्ता की सलाह :

ससुराल वालों के साथ मिल कर बातचीत करें. आपसी सलाह से मामले को सुलझाने का प्रयास करें. अगर आप लोग दोनों एक-दूसरे के साथ नहीं रहना चाहते हैं, तो कोर्ट की शरण में जायें.

निरसा से अमित कुमार का सवाल : मेरी जमीन पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है. इसको कब्जा मुक्त कराने के लिए क्या करना होगा?

अधिवक्ता की सलाह :

स्थानीय थाना में मामले की शिकायत करें. समाधान नहीं होने पर एसडीओ कोर्ट में अतिक्रमण वाद दर्ज करायें.

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