खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) की ओरसे जारी रिस्ट्रिक्टेड सर्टिफिकेट होल्डरों के प्रमोशन को लेकर कोल इंडिया के सीएमडी स्तर पर सहमति नहीं बन सकी है. जानकारी के मुताबिक गत दिनों कोलकाता स्थित कोल इंडिया मुख्यालय में आयोजित बैठक में तर्क दिया गया कि रिस्ट्रिक्टेड सर्टिफिकेट होल्डरों को प्रमोशन देने से भूमिगत कोयला उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. वहीं फर्स्ट क्लास, सेकेंड क्लास, रिस्ट्रिक्टेड और अनरिस्ट्रिक्टेड सर्टिफिकेट के बीच वरीयता तय करने में जटिलताओं की आशंका जतायी गयी.
भूमिगत उत्पादन के तर्क पर उठे सवाल
हालांकि जानकार इन तर्कों से सहमत नहीं है. उनका कहना है कि पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते है कि भूमिगत उत्पादन पहले से ही ठहराव की स्थिति में है. वित्त वर्ष 2020-21 में 26.45 एमटी, 2021-22 में 25.62 एमटी व 2022-23 में 25.49 एमटी उत्पादन हुआ है, जबकि वर्ष 2023-24 में 26.02 एमटी व 2024-25 में 25.44 एमटी उत्पादन दर्ज किया गया. इधर माइनिंग के विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमोशन रोकने के बजाय भूमिगत खनन को आकर्षक और व्यावहारिक बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि अनुभवी और तकनीकी रूप से दक्ष कर्मियों का बेहतर उपयोग हो सके.
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