गुरुदास चटर्जी : लालू यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री का पद ठुकराया, कभी बॉडीगार्ड तक नहीं लिया

Gurudas Chatterjee Death Anniversary: निरसा के दिवंगत विधायक गुरुदास चटर्जी सादगी की प्रतिमूर्ति थे. अपने गुरु के बताये रास्ते से कभी विमुख नहीं हुए. उन्होंने लालू प्रसाद यादव की सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने से इनकार कर दिया था. लालू प्रसाद ने खुद मंत्री बनने का ऑफर दिया. 14 अप्रैल 2000 को अलग झारखंड राज्य के अस्तित्व में आने से पहले ही उनकी हत्या कर दी गयी.

Gurudas Chatterjee Death Anniversary| निरसा (धनबाद), अरिंदम चक्रवर्ती : निरसा के दिवंगत विधायक गुरुदास चटर्जी ने बिहार की लालू प्रसाद यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री का ऑफर ठुकरा दिया था. अपनी जगह टुंडी के विधायक डॉ सबा अहमद को मंत्री बनाने का सुझाव बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को दिया था. डॉ अहमद मंत्री भी बने. निरसा से लगातार 3 बार विधायक रहने के बावजूद गुरुदास चटर्जी ने कभी अपनी कार नहीं खरीदी. चमक-दमक की राजनीति से सदैव दूर रहे. लालू यादव ने अपनी सरकार में मंत्री बनने का ऑफर दिया, तो गुरुदास चटर्जी ने हंसते-हंसते कहा- ‘हम तो जाति से ब्राह्मण हैं. विचार से वामपंथी हैं. जिस घर में जायेंगे, वहीं दो वक्त का भोजन मिल जायेगा.’ लालू प्रसाद से बातचीत करते हुए अपने अभिन्न मित्र और टुंडी के तत्कालीन विधायक डॉ सबा अहमद को मंत्री बनाने की सिफारिश कर दी.

गुरुदास के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले एक नेता ऐसे करते हैं याद

भले ही आज गुरुदास नहीं हैं, लेकिन उनका व्यवहार, उनके विचार, उनके संस्कार आज भी लोगों को याद हैं. गुरुदास चटर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले एक नेता कहते हैं कि स्वाभाविक रूप से राजनीतिक विरोधी थे. निरसा की एक फैक्ट्री में आंदोलन शुरू किया था. कुमारधुबी पुल से अपने एक कार्यकर्ता के स्कूटर पर बैठकर निरसा आंदोलन स्थल पर आ रहा था. गुरुदास बुलेट से चिरकुंडा की ओर जा रहे थे. कुमारधुबी पुल पर अचानक जोर से आवाज देकर रोका. गुरुदास चटर्जी अपनी बुलेट से उतरे और मुझे बुलाया. कार्यकर्ताओं की भीड़ से दूर ले गये. एकांत में कहा कि उस समय के झारखंड आंदोलन के अलावा अन्य कांड में एसपी रैंक के पुलिस अधिकारी उन्हें खोज रहे हैं. कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है. या तो अपना पक्ष रख दो, नहीं तो सरेंडर कर देना. एसपी रैंक के अफसर को कन्विंस कर दये हैं.

झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

एके राय ने कहा था- माफिया ने उनके भविष्य का कत्ल कर दिया

14 अप्रैल को बंगाली समाज के लोग पोईला वैशाख मनाते हैं. यह उनका नव वर्ष होता है. उसी दिन गुरुदास चटर्जी की हत्या कर दी गयी. अपने गुरु एके राय की बातों पर गुरुदास चटर्जी अंतिम समय तक अडिग रहे. समझौताविहीन, सुविधाविहीन राजनीति की बुनियाद रखी. 3 छोटे कमरों वाले घर में रहना, न लाल बत्ती की गाड़ी, न बॉडीगार्ड, न नौकर-चाकर से सेवा लेना, अत्यंत सादा जीवन था. समझौतावादी एवं सुविधापरस्त राजनीति को गुरुदास बदलना चाहते थे. उनकी हत्या ने मार्क्सवादी समन्वय समिति के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद एके राय को भी झकझोर दिया. अपने जीवन काल में राय साहब ने कहा था कि माफियाओं ने उनके भविष्य का कत्ल कर दिया है.

शोषणविहीन झारखंड की लड़ाई रह गयी अधूरी

14 अप्रैल 2000 को घायल अवस्था में गुरुदास चटर्जी के पास उनके बड़े भाई रामदास चटर्जी, छोटे भाई सुकेश सहित अन्य परिजन मौजूद थे. अचानक सुकेश ने कहा- ‘दादा हमें छोड़कर चले गये. अब हमारे साथ कौन खड़ा रहेगा.’ कॉमरेड गुरुदास सिर्फ अपने परिवार को छोड़कर नहीं गये. झारखंड के लोगों के कंधे पर उन अधूरे कामों को पूरा करने का दायित्व भी छोड़ गये, जो वे पूरा नहीं कर सके. अब झारखंडियों के लिए चुनौती है कि वे उनके उसूलों, आदर्शों, संघर्षों को शोषणविहीन झारखंड निर्माण में कारगर हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं या नहीं…

इसे भी पढ़ें

प्राइवेट स्कूलों को किया जा रहा बदनाम, बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ायें अधिकारी और कर्मचारी : पासवा

हेमंत सोरेन पर बाबूलाल मरांडी ने साधा निशाना, भुईंहारी जमीन में हेराफेरी पर कही बड़ी बात

बंगाल की खाड़ी में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और ट्रफ, झारखंड में वर्षा-वज्रपात का अलर्ट

हटिया-टाटानगर समेत 3 ट्रेनें रद्द, चोपन-रांची और आनंद विहार-हटिया एक्सप्रेस के रूट बदले

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >