बीसीसीएल में कोयले की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गयी है. कंपनी के विभिन्न क्षेत्रों में ग्रेड स्लिपेज के कारण वित्तीय वर्ष के दौरान कुल 73.92 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. बीसीसीएल के आंतरिक गुणवत्ता मूल्यांकन में सामने आया है कि कंपनी का औसत ग्रेड कन्फर्मेशन 89.99 प्रतिशत रहा, जबकि कुल ग्रेड स्लिपेज 10.01 प्रतिशत दर्ज किया गया. इससे कंपनी की आय पर सीधा असर पड़ा है.
कुसुंडा एरिया सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र
रिपोर्ट के अनुसार कुसुंडा एरिया सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र पाया गया. यहां ग्रेड स्लिपेज 19.26 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिससे कंपनी को 28.62 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ. इसके बाद लोदना एरिया में 22.28 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
क्या है ग्रेड स्लिपेज
ग्रेड स्लिपेज का अर्थ है कि जिस गुणवत्ता के कोयले का उत्पादन व आपूर्ति दिखायी गयी, वास्तविक गुणवत्ता उससे कम पायी गयी. इससे उपभोक्ताओं को कम गुणवत्ता का कोयला मिलता है और कंपनी को निर्धारित मूल्य से कम राजस्व प्राप्त होता है. यही वजह है कि कोयला कंपनियां ग्रेड कन्फर्मेशन को बेहतर बनाने पर लगातार जोर दे रही है. बीसीसीएल सीएमडी मनोज अग्रवाल ने सभी एरिया प्रबंधन को कोयला के गुणवत्ता को लेकर विशेष जोर देने का निर्देश दिया है.
इजे एरिया की स्थिति चिंताजनक
रिपोर्ट में इजे एरिया की स्थिति भी चिंताजनक बतायी गयी है. यहां ग्रेड स्लिपेज 27.06 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो सभी क्षेत्रों में सबसे अधिक है. हालांकि उत्पादन व बिक्री की मात्रा कम होने के कारण वित्तीय नुकसान 1.93 करोड़ रुपये तक ही सीमित रहा. वहीं सीवी एरिया का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा. यहां ग्रेड स्लिपेज मात्र 2.83 प्रतिशत रहा. इस कारण वित्तीय नुकसान केवल 17 लाख रुपये हुआ.
बरोरा, कतरास व बस्ताकोला एरिया का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर
बरोरा, कतरास और बस्ताकोला एरिया ने भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है. इन क्षेत्रों में ग्रेड स्लिपेज सात फीसदी के आसपास सीमित रहा. इसके बावजूद करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ. कोयला उद्योग के जानकारों का मानना है कि ग्रेड स्लिपेज केवल वित्तीय नुकसान का विषय नहीं है, बल्कि इससे ग्राहकों का भरोसा भी प्रभावित होता है.
गुणवत्ता में सुधार के लिए उठाये कई कदम
बीसीसीएल प्रबंधन ने हाल के वर्षों में कोयले की गुणवत्ता में सुधार के लिए कई कदम उठाये हैं. इनमें ऑनलाइन सैंपलिंग, मैकेनाइज्ड कोल हैंडलिंग, डिस्पैच प्वाइंट पर निगरानी, गुणवत्ता ऑडिट और थर्ड पार्टी सैंपलिंग आदि शामिल हैं. इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में ग्रेड स्लिपेज का उच्च स्तर यह संकेत देता है कि गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है.-
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