धनबाद : सिजुआ स्टेडियम की धरोहर संकट में, माली के वेतन विवाद पर नागरिकों का सत्याग्रह जारी

Dhanbad News : धनबाद के सिजुआ स्टेडियम को बचाने और माली सोमनाथ दलाई के दो वर्षों से रुके वेतन को दिलाने की मांग को लेकर स्थानीय नागरिकों का सत्याग्रह लगातार जारी है, जिससे बीसीसीएल प्रबंधन पर दबाव बढ़ गया है.

इन्द्रजीत पासवान की रिपोर्ट 

Dhanbad News : बीसीसीएल क्षेत्र के प्रसिद्ध सिजुआ स्टेडियम, जो झारखंड की खेल संस्कृति की एक महत्वपूर्ण धरोहर रहा है, आज अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है. स्टेडियम को बचाने और इसके देखभाल करने वाले माली सोमनाथ दलाई के लंबित वेतन के भुगतान के लिए स्थानीय नागरिकों और सिजुआ एजुकेशनल एंड स्पोर्ट्स क्लब द्वारा लगातार आंदोलन किया जा रहा है. बीते चार दिनों से आंदोलनकारी बीसीसीएल के सिजुआ क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य द्वार पर सत्याग्रह पर बैठे हुए हैं. इस दौरान उन्होंने प्रबंधन से मांग की है कि स्टेडियम को किसी भी प्रकार के खतरे से बचाया जाए और सोमनाथ दलाई का दो वर्ष का बकाया वेतन तुरंत चुकाया जाए. अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई है, जिससे सिजुआ के नागरिकों, खेल प्रेमियों और स्थानीय युवाओं में प्रबंधन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है. 

चौथे दिन भिक्षाटन पर निकले समिति सदस्य

आंदोलन के चौथे दिन स्थिति और भी भावुक हो गई. माली सोमनाथ दलाई की दयनीय आर्थिक स्थिति को देखते हुए समिति के सदस्य भिक्षाटन पर निकले. सिजुआ के ग्रामीणों ने इस अभियान में भरपूर सहयोग दिया. लोग अपनी क्षमता अनुसार चंदा दे रहे हैं, जिसे सोमनाथ दलाई के परिवार को सौंपा जाएगा जिससे उन्हें दो वक्त की रोटी मिल सके। समिति के सदस्यों ने कहा, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक स्थिति है. जिस व्यक्ति ने स्टेडियम को अपने जीवन के तीन दशक समर्पित कर दिए, उसी को उसका हक नहीं दिया जा रहा है. यह न केवल सोमनाथ दलाई के साथ अन्याय है, बल्कि पूरे सिजुआ क्षेत्र की खेल भावना के साथ धोखा है. 

सोमनाथ दलाई की नियुक्ति और वादा

सोमनाथ दलाई को बीसीसीएल प्रबंधन ने स्टेडियम की स्थापना के समय ही मैदान की देखभाल, रखरखाव और हरियाली बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी थी. उस समय तय किया गया था कि कंपनी हर वर्ष अप्रैल माह में उन्हें एकमुश्त राशि का भुगतान करेगी. सोमनाथ दलाई पिछले 30 वर्षों से इस स्टेडियम को अपनी मां की तरह संजोए हुए थे. उन्होंने मौसम की हर परिस्थिति में स्टेडियम की देखभाल की, घास काटी, पौधे लगाए और मैदान को खेलने योग्य बनाए रखा, लेकिन पिछले दो वर्ष से प्रबंधन ने उनके वेतन पर रोक लगा दी है. इससे न केवल उनका परिवार संकट में है, बल्कि स्टेडियम की नियमित देखभाल भी प्रभावित हो रही है. 

स्टेडियम का महत्व

सिजुआ स्टेडियम लंबे समय से स्थानीय युवाओं के लिए खेल का प्रमुख केंद्र रहा है. यहां फुटबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स सहित विभिन्न खेल गतिविधियां नियमित रूप से होती रही हैं. यह स्टेडियम सिर्फ खेल का मैदान नहीं, बल्कि सिजुआ की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का प्रतीक भी है. स्थानीय लोग इसे सिजुआ की धरोहर मानते हैं और इसके संरक्षण की मांग कर रहे हैं. आंदोलनकारी चेतावनी दे रहे हैं कि यदि जल्द ही स्टेडियम के अस्तित्व और माली के वेतन संबंधी मसले का समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा. उन्होंने बीसीसीएल उच्चाधिकारियों और झारखंड सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की है. 

सिजुआ के नागरिकों का आह्वान

स्टेडियम हमारी पहचान है. इसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है. स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर काफी चर्चा हो रही है. खेल प्रेमी और सामाजिक संगठन अब इस आंदोलन में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं. अभी तक बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. सिजुआवासियों की नजरें अब उच्च अधिकारियों पर टिकी हुई हैं कि वे इस मानवीय और सांस्कृतिक संकट का शीघ्र समाधान निकालें. 

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Published by: Priya Gupta

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