धनबाद में प्रदूषण कम करने के लिए मिले 147 करोड़, खर्च हुए सिर्फ 19.94 करोड़

धनबाद में वायु प्रदूषण कम करने के लिए मिले 147 करोड़ रुपये में से 127 करोड़ खर्च नहीं हुए। पीएम10 का स्तर अभी भी राष्ट्रीय मानक से 2.3 गुना अधिक है।

धनबाद में वायु प्रदूषण कम करने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत केंद्र से करोड़ों रु मिले, लेकिन 147.06 करोड़ रुपये में से 127.12 करोड़ रु खर्च नहीं हो सके. वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान सिर्फ 19.94 करोड़ रुपये खर्च किये गये. यानी जारी राशि का करीब 13.6 प्रतिशत ही उपयोग हुआ.

दूसरी ओर, इसी अवधि में धनबाद का पीएम10 स्तर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक से ऊपर रहा. उक्त जानकारी केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 10 अगस्त को लोकसभा में दी.

योजनाओं की रफ्तार धीमी

बताया जाता है कि धनबाद के साथ रांची और जमशेदपुर अर्बन एरिया भी 2023-24 से 2025-26 तक लगातार पीएम10 के राष्ट्रीय मानक से ऊपर रहे. एनसीएपी के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग सड़क की धूल कम करने, सड़कों के पक्कीकरण, हरित क्षेत्र विकसित करने, यातायात प्रबंधन, माइक्रो फॉरेस्ट और अन्य वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों में किया जाता है. जारी राशि और खर्च के बीच बड़ा अंतर एनसीएपी के तहत योजनाओं के क्रियान्वयन की गति पर सवाल खड़ा करता है.

धनबाद लक्ष्य से अब भी दूर

धनबाद की हवा में पिछले कुछ वर्षों में सुधार जरूर हुआ है. वर्ष 2017-18 में पीएम10 की वार्षिक औसत सांद्रता 315 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर थी, जो 2024-25 में घटकर 138 माइक्रोग्राम रह गयी. यानी इस अवधि में करीब 56 प्रतिशत की कमी आयी. इसके बावजूद यह स्तर पीएम10 के राष्ट्रीय वार्षिक मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से 78 माइक्रोग्राम अधिक है.

धनबाद वर्ष 2019 में एनसीएपी में शामिल हुआ था. कार्यक्रम के तहत शहरों में पीएम10 और पीएम2.5 का प्रदूषण कम करने के लिए सिटी एक्शन प्लान लागू किये गये हैं. केंद्र ने 2025-26 तक पीएम10 में 40 प्रतिशत तक कमी लाने अथवा राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक हासिल करने का लक्ष्य तय किया था.

देश के 108 शहरों में प्रदूषण कम

वर्ष 2025-26 में एनसीएपी के 130 शहरों में से 108 में वर्ष 2017-18 की तुलना में पीएम10 की सांद्रता कम हुई. इनमें 72 शहरों में 20 प्रतिशत से अधिक और 26 शहरों में 40 प्रतिशत से अधिक कमी दर्ज की गयी. हालांकि, राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक हासिल करने वाले शहरों की संख्या 2025-26 में सिर्फ 14 रही, जबकि 2017-18 में छह शहर ही इस स्तर पर थे.

झारखंड में भी स्थिति चिंताजनक

रांची के लिए 2023-24 से 2025-26 के दौरान 68.62 करोड़ रु जारी किये गये और 39.95 करोड़ रु खर्च हुए. वहीं जमशेदपुर अर्बन एरिया के लिए इस अवधि में नयी राशि जारी नहीं की गयी, लेकिन 23.03 करोड़ रुपये खर्च किये गये. इसमें पूर्व के वर्षों में जारी राशि का उपयोग भी शामिल है. धनबाद, रांची और जमशेदपुर तीनों शहरों में पीएम10 लगातार तीन वित्तीय वर्षों में राष्ट्रीय मानक से अधिक रहा.

119 शहरों में प्रदूषण के स्रोतों का निर्धारण

एनसीएपी के तहत देश के 119 शहरों में प्रदूषण के स्रोतों का निर्धारण कराया गया है. इसमें वाहनों, उद्योगों, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों, घरेलू ईंधन आदि से होने वाले प्रदूषण का आकलन किया जाता है.

धनबाद जैसे कोयला आधारित शहर के लिए स्रोत आधारित अध्ययन महत्वपूर्ण है. यहां खनन, कोयला परिवहन, औद्योगिक गतिविधियां और सड़क की धूल प्रदूषण नियंत्रण की प्रमुख चुनौतियां हैं. स्रोतों की स्पष्ट पहचान से नियंत्रण के उपाय अधिक प्रभावी ढंग से लागू किये जा सकते हैं.


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लेखक के बारे में

By अशोक कुमार

गांधीवादी चिंतक ट्रस्टी, सर्व सेवा संघ,
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