Dhanbad News: एपीके स्कैम से लोगों के बैंक खाते खाली कर रहे साइबर अपराधी

साइबर अपराध के अनुसंधान को लेकर पुलिस मुख्यालय में तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शुरू़

साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को देखते हुए समाहरणालय स्थित पुलिस मुख्यालय में सोमवार को तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण सत्र शुरू किया गया. इसका उद्देश्य पुलिस पदाधिकारियों को साइबर अपराध के बदलते तौर-तरीकों से अवगत कराना और उनके प्रभावी अनुसंधान तकनीकों से लैस करना है. प्रशिक्षण का उद्घाटन एसएसपी प्रभात कुमार ने किया. इस दौरान ग्रामीण एसपी कपिल चौधरी, सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव, डीएसपी विधि व्यवस्था नौशाद आलम, एसडीपीओ सिंदरी आशुतोष सत्यम, डीएसपी साइबर संजीव कुमार, डीएसपी सुनील कुमार सिंह, डीएसपी प्रदीप कुमार व ट्रेनिंग के लिए विशेषज्ञ सूयश भारती मौजूद थे.

साइबर अपराध के खिलाफ प्रशिक्षित पुलिस बल जरूरी : एसएसपी

एसएसपी प्रभात कुमार ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस पदाधिकारियों को साइबर अपराध के अनुसंधान व उसके प्रभावी रोकथाम के लिए दक्ष बनाना है. तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध के खिलाफ तकनीकी रूप से प्रशिक्षित पुलिस बल की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है. कहा कि प्रशिक्षण की समाप्ति के बाद सभी प्रतिभागियों की परीक्षा भी ली जाएगी. इसमें सफल होने वाले पदाधिकारियों को पुरस्कृत किया जायेगा. वहीं, जो असफल रहेंगे, उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई होगी.

बड़ी संख्या में पुलिस पदाधिकारी हुए शामिल

प्रशिक्षण सत्र के पहले दिन दो पालियों में कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें जिले के विभिन्न थानों से बड़ी संख्या में पुलिस पदाधिकारी शामिल हुए. विशेषज्ञ प्रशिक्षक सुयश भारती ने साइबर अपराध की जटिलता, तकनीकी पहलुओं व जांच की बारीकियों पर जानकारी दी.

एपीके स्कैम क्या है और कैसे बन रहा बड़ा खतरा

प्रशिक्षण में एपीके स्कैम पर फोकस किया गया. बताया कि यह एक प्रकार की फाइल होती है, जिसका उपयोग मोबाइल एप इंस्टॉल करने में किया जाता है. साइबर अपराधी नकली एप बना लोगों को व्हाट्स एप्प, एसएमएस या सोशल मीडिया के जरिए लिंक भेजते हैं. जैसे ही कोई उस एपीके फाइल को डाउनलोड व इंस्टॉल करता है, उसका मोबाइल हैक हो सकता है. अपराधी मोबाइल का पूरा कंट्रोल हासिल कर लेते हैं. ओटीपी, बैंकिंग डिटेल्स व पासवर्ड चुरा लेते हैं. कुछ मामलों में फोन को रिमोट से ऑपरेट कर बैंक अकाउंट तक खाली कर देते हैं. कई बार ऐसी फाइल केवाइसी अपडेट, बैंक एप, कूरियर सर्विस, सरकारी योजना या लॉटरी जीतने जैसे नामों से भेजी जाती है.

अनजान लिंक से ऐप डाउनलोड न करें

इस दौरान सलाह दी गयी कि किसी भी अनजान लिंक से ऐप डाउनलोड न करें. केवल गुगल प्ले स्टोर या विश्वसनीय स्रोत से ही एप इंस्टॉल करें. किसी के साथ ओटीपी या बैंक डिटेल्स साझा न करें. संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना दें.

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By ASHOK KUMAR

ASHOK KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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