मनोहर कुमार
Dhanbad: झारखंड और कोयलांचल क्षेत्र के लिए बड़ी खुशखबरी है. कोल इंडिया लिमिटेड ने राज्य में करीब 3300 करोड़ रुपये की लागत से आठ नयी कोल वाशरी प्लांट स्थापित करने की योजना को मंजूरी दे दी है. इन प्लांटों के शुरू होने से कोयले की गुणवत्ता में सुधार होगा और स्टील उद्योग को बेहतर कच्चा माल उपलब्ध हो सकेगा. योजना के तहत तीन वाशरी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) और पांच सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के अधीन स्थापित की जायेंगी. इन सभी वाशरियों के चालू होने के बाद हर साल लगभग 21.5 मिलियन टन वाश्ड कोल का उत्पादन होगा, जिसमें सीसीएल की हिस्सेदारी 14.5 मिलियन टन और बीसीसीएल की सात मिलियन टन होगी.
मौजूदा वाशरियों को सुधारने पर खर्च होंगे 300 करोड़ रुपये
यही नहीं, मौजूदा वाशरियों को सुधारने पर अलग से 300 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. कोल इंडिया प्रबंधन के अनुसार, पुरानी और आउटडेटेड हो चुकी तीन वाशरियों को राष्ट्रीय मुद्रीकरण नीति के तहत नये तरीके से उपयोग में लाने की योजना भी बनायी जा रही है. दरअसल, देश में स्टील सेक्टर को बेहतर गुणवत्ता वाले कोयले की जरूरत लगातार बढ़ रही है. वर्तमान में इसका बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है.
कोल इंडिया ने टाटा स्टील के साथ मिलकर शुरू किया काम
झारखंड, खासकर धनबाद क्षेत्र, कोकिंग कोल के लिए जाना जाता है, जो स्टील बनाने में बेहद जरूरी होता है. इसी को ध्यान में रखते हुए अब कोयले की मात्रा से ज्यादा गुणवत्ता पर जोर दिया जा रहा है. इस दिशा में कोल इंडिया ने टाटा स्टील के साथ मिलकर बेहतर गुणवत्ता का कोयला उपलब्ध कराने की दिशा में काम भी शुरू कर दिया है. इस योजना के लागू होने से झारखंड की भूमिका स्टील सेक्टर में और मजबूत होगी. साथ ही, धनबाद समेत अन्य क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.
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