शोभित रंजन, धनबाद, झरिया के अग्नि व भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को और प्रभावी बनाने के लिए झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार (जेआरडीए) ने बड़ा कदम उठाया है. बलियापुर अंचल के बेलगड़िया में स्थित 39 एकड़ सरकारी गैर-आबाद भूमि को 99 वर्षों की लीज पर जेआरडीए के नाम हस्तांतरित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है. इस जमीन पर अस्पताल, माइक्रो एंटरप्राइजेज, टेक्सटाइल उद्योग, कम्युनिटी हॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स समेत कई आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा. यह पहल केवल पुनर्वासित परिवारों को सुविधाएं देने तक सीमित नहीं है, बल्कि झरिया मास्टर प्लान के तहत सुरक्षित और आत्मनिर्भर पुनर्वास नगर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
39 एकड़ भूमि पर विकसित होगा नया सुविधा केंद्र
झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार की ओर से राजस्व, निबंधन व भूमि सुधार विभाग को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार बलियापुर अंचल के मौजा बेलगडिया की कुल 39 एकड़ भूमि को 99 वर्ष की लीज पर देने का अनुरोध किया गया है. इसमें हाल सर्वे खाता संख्या-176 के अंतर्गत प्लॉट संख्या 1072, 1074, 1226, 1228, 1231 और 1247 की कुल 14.75 एकड़ भूमि तथा प्लॉट संख्या 250 की 14.25 एकड़ भूमि व अन्य 10 एकड़ भूमि शामिल है. चयनित भूखंड बेलगड़िया पुनर्वास कॉलोनी के समीप स्थित है, जहां पहले से बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार रह रहे हैं.
झरिया पुनर्वास की सबसे बड़ी परियोजना
बेलगड़िया टाउनशिप झरिया पुनर्वास योजना की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है. हाल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यहां आठ चरणों (फेज) में 18,272 आवासों का निर्माण किया गया है, जो 1,191 ब्लॉकों में विकसित हैं. यह टाउनशिप झरिया के आग और भू-धंसान प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने के उद्देश्य से बनायी गयी है.
अस्पताल और रोजगार केंद्र बनेंगे सबसे बड़ी जरूरत
सरकार के हालिया सर्वे में पाया गए कि पुनर्वास केवल लोगों को मकान देने तक सीमित नहीं रह सकता. उक्त स्थान पर अस्पताल, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, पुलिस स्टेशन, डाकघर, सड़क संपर्क और रोजगार के अवसर विकसित करना जरूरी है. इसी आवश्यकता को देखते हुए जेआरडीए ने 39 एकड़ अतिरिक्त भूमि पर अस्पताल, टेक्सटाइल उद्योग, माइक्रो एंटरप्राइजेज और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स विकसित करने की योजना बनायी है.
तीन हजार परिवार का हुआ है पुनर्वास
झरिया मास्टर प्लान के क्रियान्वयन में वर्षों की देरी के बावजूद अब तक लगभग तीन से साढ़े तीन हजार परिवारों को ही बेलगढ़िया टाउनशिप में स्थानांतरित किया गया है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अभी भी अग्नि प्रभावित और असुरक्षित क्षेत्रों में रहने को मजबूर हैं. वहीं उक्त जगह पर 16 हजार से अधिक आवास बनाए गए है. वहीं कोयला मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 81 अतिसंवेदनशील इलाकों में से 15,080 परिवारों को शिफ्ट कराना है.
