धनबाद में 108 एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था एक बार फिर चरमरा गयी है. एसएनएमएमसीएच से रिम्स रेफर किये जाने वाले गंभीर मरीजों को भी समय पर सरकारी एंबुलेंस नहीं मिल पा रही है. दो दिनों में रिम्स रेफर किये गये पांच मरीज अब तक 108 एंबुलेंस का इंतजार करते रहे. इनमें से अधिकांश मरीजों के परिजनों ने मजबूरी में अपनी जेब से पैसे खर्च कर निजी एंबुलेंस की व्यवस्था की और मरीजों को रिम्स ले गये.
वहीं, निरसा का एक मरीज अब भी 108 एंबुलेंस मिलने की उम्मीद में इंतजार कर रहा है. एंबुलेंस की कमी का सबसे ज्यादा असर गंभीर मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ रहा है. सरकारी अस्पताल से रिम्स रेफर होने के बाद परिजनों को उम्मीद रहती है कि उन्हें जल्द सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध हो जायेगी, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ रही है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निजी एंबुलेंस का किराया जुटाना भी बड़ी चुनौती बन गया है.
तीन-चार मरीजों को एक साथ भेजने की मजबूरी
जानकारी के अनुसार पिछले दो-तीन दिनों में रिम्स रेफर किये गये मरीजों की संख्या तीन-चार होने के बाद उन्हें एक ही एंबुलेंस से रिम्स भेजने की व्यवस्था की जा रही है. यानी मरीजों की संख्या बढ़ने का इंतजार किया जा रहा है, ताकि एक साथ कई मरीजों को रिम्स भेजा जा सके. इस व्यवस्था के कारण गंभीर मरीजों को भी तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध नहीं मिल पा रही है. रेफर किये गये मरीजों के परिजन अस्पताल परिसर में एंबुलेंस के इंतजार में परेशान हैं.
श्रावणी मेले में भेजी गयीं सात एंबुलेंस
धनबाद में 108 एंबुलेंस का संचालन करने वाली एजेंसी के मैनेजर संजय कुमार दसौंधी के अनुसार जिले में मौजूद 20 में से सात एंबुलेंस को श्रावणी मेले में भेज दिया गया है. इसी वजह से जिले में एंबुलेंस की उपलब्धता कम हो गयी है और मरीजों को समय पर सेवा देने में परेशानी हो रही है.
उनके अनुसार एंबुलेंस की संख्या कम होने के कारण रिम्स रेफर मरीजों को तत्काल अलग-अलग एंबुलेंस उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है. उपलब्ध संसाधनों के अनुसार मरीजों को भेजने की व्यवस्था की जा रही है.
