15 दिनों में होनी थी बेनीडीह एनकाउंटर मामले की जांच, पर 28 माह बाद भी सभी दर्ज नहीं हो पाया सभी गवाहों का बयान

हद है : सीआइएसएफ और ग्रामीणों के बीच मुठभेड़ में चार की हुई थी मौत, पांच एडीएम, तीन एसडीएम बदल गये

संजीव झा, धनबाद,

बाघमारा अंचल के बेनीडीह में सीआइएसएफ व कोयला चोरी के आरोप में ग्रामीणों के बीच हुए एनकाउंटर मामले की प्रशासनिक जांच 28 माह बाद भी अधूरी है. सनद रहे घटना के बाद 15 दिनों के अंदर जांच कर पूरी रिपोर्ट देने का दावा किया गया था. अभी हालात यह है कि इस मामले के मुख्य जांच अधिकारी सहित दूसरे सदस्यों का कई बार ट्रांसफर भी हो गया, पर जांच तो दूर अब तक सभी गवाहों का बयान भी दर्ज नहीं किया जा सका है. बता दें कि इस एनकाउंटर में चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि सीआइएसएफ के दो जवान घायल हुए थे. इतनी बड़ी घटना की जांच अब तक पूरी नहीं होना प्रशासनिक कामकाज पर कई सवाल खड़ा करता है.

क्या है मामला

19 नवंबर 2022 की रात सीआइएसएफ की क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) व ग्रामीणों के बीच बेनीडीह रेलवे साइडिंग के पास भिड़ंत हो गयी थी. सीआइएसएफ के अनुसार साइडिंग पर जमा लोग कोयला चोरी कर रहे थे. जब वहां पर जवानों ने उन्हें रोका, तो उन लोगों ने हमला कर दिया. इसके बाद आत्मरक्षार्थ जवानों ने कार्रवाई की. इस घटना में चार लोगों की मौत हो गयी थी, जबकि सीआइएसएफ के दो जवान सहित अन्य कई घायल हो गये थे. इस मामले में दोनों तरफ से एफआइआर दर्ज करायी गयी थी. तत्कालीन उपायुक्त संदीप सिंह ने मामले की प्रशासनिक जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की थी. टीम को 15 दिनों के अंदर जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था. टीम का प्रमुख एडीएम (विधि-व्यवस्था) को बनाया गया था. टीम में एसडीएम को भी रखा गया था.

बदलते रहे अधिकारी, ठंडे बस्ते में पड़ता गया मामला

जांच टीम जब बनी, उस वक्त धनबाद के अपर समाहर्ता एनके गुप्ता एडीएम (विधि-व्यवस्था) के प्रभार में भी थे. उन्होंने मामले की जांच शुरू की. इसी बीच एडीएम (विधि-व्यवस्था) का प्रभार तत्कालीन डीआरडीए निदेशक मुमताज अली को मिल गया. इसके कुछ दिन बाद ही में यहां एडीएम (विधि-व्यवस्था) के रूप में कमलाकांत गुप्ता की पोस्टिंग हो गयी. श्री गुप्ता एक बार भी जांच के लिए घटनास्थल पर नहीं गये, इसी बीच उनका भी तबादला हो गया. फिर एडीएम (विधि-व्यवस्था) के रूप में हेमा प्रसाद की पोस्टिंग हुई. इसी बीच लोकसभा चुनाव की घोषणा हो गयी और मामला लटक गया. लोकसभा चुनाव के बाद हेमा प्रसाद का तबादला हो गया और पीयूष सिन्हा धनबाद के एडीएम (विधि-व्यवस्था) बने. उनके प्रभार लेने के कुछ दिन बाद ही विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गयी और फिर मामला वहीं का वहीं पड़ा रहा. इस बीच जांच टीम के कई सदस्य भी बदल गये. इसमें एसडीएम के रूप में भी तीन अधिकारी यहां आये-गये. इन सबके बीच इस पूरे मामले की फाइल खुली ही नहीं.

अभी तक जिनके बयान हुए दर्ज

सूत्रों के अनुसार जांच टीम के पास अब तक इस मामले में सीआइएसएफ के कुछ अधिकारियों व क्यूआरटी में शामिल जवानों ने ही बयान दर्ज कराया है. पुलिस के भी एक-दो अधिकारियों का ही बयान दर्ज हुआ है. इस मामले में अब तक एक भी ग्रामीण का बयान नहीं दर्ज हुआ है, जबकि एक दर्जन लोगों ने गवाही के लिए आवेदन दिया था. इस मामले को लेकर तब काफी विवाद हुआ था. आरोप-प्रत्यारोप भी खूब चले थे.

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Author: SANJEEV JHA

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