Dhanbad News: हुचुकटांड़ : एक ऐसा गांव जो बारिश में बन जाता है टापू, घरों में कैद हो जाते हैं लोग

Dhanbad News: आज भी विकास से अछूता है बलियापुर प्रखंड की करमाटांड़ पंचायत का यह आदर्श गांव

Dhanbad News: हुचुकटांड़ (धनबाद) से लौटकर विक्की प्रसाद

: “साहब, हमलोगों को विकास नहीं, बस जीने लायक सुविधाएं चाहिए. अगर इतना भी मिल जाये, तो हमारा यह गांव भी देश के शेष हिस्से जैसा बन जायेगा.” ये मर्मस्पर्शी शब्द हैं 48 वर्षीय रामेश्वर टुडू के. रामेश्वर बलियापुर प्रखंड की करमाटांड़ पंचायत के आदर्श गांव हुचुकटांड़ के बाशिंदे हैं. जिला मुख्यालय से महज पांच किमी की दूरी पर स्थित हुचुकटांड़ एक ऐसा गांव है, जो केवल सरकारी कागजों पर ही आदर्श का दर्जा रखता है, जबकि हकीकत कोसों दूर है. आजादी के 79 वर्षों बाद भी हुचुकटांड़ विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ है. ग्रामीण तेलो देवी कहती हैं, “सड़क नहीं होने के चलते हमारी जिंदगी थम-सी गयी है. बरसात में आना-जाना मुश्किल हो जाता है. कादो-कीचड़ से रास्ता खतरनाक हो जाता है. पूरे बरसात गांव के अधिकांश बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं. स्कूल वाहन और अन्य वाहन वाले रास्ता नहीं होने की वजह से गांव में आने से साफ मना कर देते हैं.” दरअसल, गांव में सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी समस्या आज भी बनी हुई है. सात वर्ष पूर्व तत्कालीन राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने हुचुकटांड़ को गोद लिया था, पर यहां कोई ठोस बदलाव नहीं दिखा. सड़क नहीं होने से बारिश के दिनों में गांव टापू बन जाता है. ग्रामीण इस कदर नाराज हैं कि आगामी किसी भी चुनाव में वोट बहिष्कार का मन बना रखे हैं.

रेलवे एनओसी देता, तो गांव तक बन जाती सड़क

हुचुकटांड़ नयी दिल्ली-हावड़ा ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन पर धोखरा हॉल्ट स्टेशन के पास बसा है. गांव की दोनों ओर रेलवे की जमीन है. बीच में यह गांव है. शहर से बेहद करीब होने के बाद भी यहां तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है. असल में हुचुकटांड़ जाने के लिए रास्ता ही नहीं है. रेलवे से एनओसी नहीं मिलने के कारण पिछले सात सालों से सड़क का काम रुका पड़ा है. ग्रामीण बताते हैं कि निर्माण प्रक्रिया कई बार शुरू हुई, लेकिन हर बार रेलवे की अनुमति नहीं मिलने के कारण काम रुक गया.

सबसे बड़ा सवाल : कहां हैं हमारे जनप्रतिनिधि

गांव की दुर्दशा को लेकर सबसे बड़ा सवाल जवाबदेहों से है. क्या कारण है कि वर्षों से एक एनओसी के कारण यहां सड़क निर्माण ठप है. क्या जिला प्रशासन, रेलवे व जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी इसकी वजह है या फिर कुछ और? कारण चाहे कुछ भी हो, इस तालमेल की कमी का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है. यह केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का उदाहरण भी है.

खाट पर लादकर मरीज को सड़क तक ले जाते हैं ग्रामीण

सड़क नहीं होने का असर केवल रोजमर्रा की गतिविधियों पर ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ता है. बारिश में गांव तक पहुंचना या बाहर निकलना बेहद कठिन हो जाता है. किसी की तबीयत बिगड़ जाये, तो ग्रामीण मरीज को खाट पर लादकर या ट्रैक्टर से किसी तरह मुख्य सड़क तक पहुंचाते हैं. वहां से उसे किसी वाहन से चिकित्सक के पास ले जाया जाता है. ग्रामीण केस्की देवी कहती हैं, “पिछले साल मेरे पति की तबीयत अचानक बिगड़ गयी थी. सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं आयी, तो मजबूरी में रात में चार लोग उन्हें साइकिल पर बैठाकर अस्पताल पहुंचाये.”

जलमीनार बना, पर दो साल बाद भी नहीं मिला पानी

हुचुकटांड़ में पेयजल की गंभीर समस्या है. ढांगी के समीप एक जलमीनार बनाकर गांव तक पाइपलाइन बिछाई गयी है. लेकिन दो साल बाद भी पाइपलाइन से एक बूंद पानी गांव तक नहीं पहुंचा है. ग्रामीणों के राेजमर्रा का काम चापाकल और कुएं पर निर्भर है. गर्मी के दिनों में पानी के लिए झगड़े की नौबत आ जाती है. यहां के अधिकांश चापाकल या तो खराब हैं या उनका पानी पीने लायक नहीं है. कई परिवार प्रतिदिन दो-तीन किमी दूर से पानी ढोकर लाते हैं.

वादे हैं, वादों का क्या… आश्वासन धरातल पर नहीं उतरा

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार अपनी समस्याएं स्थानीय सांसद, विधायक और जिला प्रशासन तक पहुंचायीं. हर बार समाधान का भरोसा मिला. लेकिन आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई. ग्रामीण बबलू रवानी ने बताया कि हर चुनाव में नेता आते हैं, वादा करते हैं कि सड़क बनेगी, पानी आयेगा. किंतु चुनाव के बाद किसी को वादा याद नहीं रह जाता है.

सड़क-पानी की समस्या दूर नहीं हुई, तो नहीं करेंगे वोट

लगातार उपेक्षा से त्रस्त ग्रामीणों ने अब चुनाव में वोट नहीं देने का सामूहिक निर्णय लिये हैं. ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर बैठक कर यह फैसला लिया है कि जब तक सड़क और पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो जाता है, वे मतदान केंद्र तक नहीं जायेंगे. ग्रामीणों का कहना है कि यह उनका सत्याग्रह है, ताकि प्रशासन उनकी समस्याओं पर ध्यान दे.

बोले पूर्व राज्य सदस्य

मामला संज्ञान में है. ग्रामीणों को नक्शा के साथ रेलवे को आवेदन करने को कहा गया था. ग्रामीणों को चाहिए कि स्थानीय जनप्रतिनिधि के साथ रेलवे को आवेदन करें. वे रेल मंत्री से बात करेंगे. प्रयास रहेगा कि हुचुकटांड़ में सड़क निर्माण को मंजूरी मिलने के साथ निर्माण शुरू हो.

महेश पोद्दार, पूर्व राज्यसभा सदस्यB

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