Dhanbad News : एसीबी जांच में फंसी है 200 करोड़ की सड़क, निगम ने एसीबी से मांगी काम कराने की अनुमति

2020 से एसीबी कर रही जांच, पूर्व मेयर, पूर्व नगर आयुक्त व एजेंसी से हो चुकी है पूछताछ, वर्तमान में न तो सड़कों की हो रही मरम्मत और न ही जलती है स्ट्रीट लाइट

एसीबी (भष्ट्राचार निरोधक ब्यूरो) की जांच में नगर निगम की 200 करोड़ की इंटीग्रेटेड सड़क का मामला लटका हुआ है. पिछले पांच साल से एसीबी मामले की जांच कर रही है. पूर्व मेयर, पूर्व नगर आयुक्त व एजेंसी से पूछताछ हो चुकी है. इसके अलावा घोटाला से संबंधित कागजात की पड़ताल की गयी है. एसीबी जांच के कारण 38 ग्रुप की सड़कों की न तो मरम्मत हो रही है और न ही स्ट्रीट लाइट जल रही है. नगर निगम ने एसीबी को पत्र लिखकर काम करने की अनुमति मांगी है. एसीबी को दिये पत्र में नगर निगम ने कहा है कि इंटीग्रेटेड सड़क का काम काफी पुराना हो गया है. कुछ ग्रुप का काम आधा-अधूरा लटका है, तो कुछ संवेदक का पेमेंट फंसा है. नगर निगम ने एक नहीं बल्कि तीन-तीन रिमांडर एसीबी को दिया है.

क्या है मामला :

14 वें वित्त आयोग के 200 करोड़ के फंड से अलग-अलग 38 ग्रुप में इंटीग्रेटेड का टेंडर निकला. कुछ का काम पूरा हो गया, तो कुछ का 80-90 प्रतिशत तक काम हुआ था. मुख्यमंत्री के आदेश पर वर्ष 2020 में एसीबी ने जांच शुरू की. इसके बाद इंटीग्रेटेड सड़कों के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी. लगभग 38 करोड़ की निर्माण कार्य पर फंसा हुआ है.

कहां-कहां फंसा है सड़कों का काम :

वार्ड नंबर 23 में अलग-अलग ग्रुप में 4.91 करोड़, वार्ड नंबर 21 में अलग-अलग ग्रुप में 2 करोड़ 31 लाख, वार्ड नंबर 39 में अलग-अलग ग्रुप में 4 करोड़ 97 लाख, वार्ड नंबर 03 में अलग-अलग ग्रुप में 4.57 करोड़, वार्ड नंबर 22 आदि वार्डों में सड़कों का काम रोका गया है. इसके अलावा वेस्ट मोदीडीह से लेकर गुहीबांध में 2.39 करोड़ का काम रूका हुआ है.

विधान सभा में भी उठ चुका है मामला :

विधायक राज सिन्हा ने 200 करोड़ के इंटीग्रेटेड सड़क का मामला विधान सभा में उठा चुके हैं. विधायक श्री सिन्हा ने गुरुवार (27 मार्च) को नगर विकास विभाग को पत्र लिखा है. इसमें कहा है कि एसीबी जांच के क्रम में 38 ग्रुप की सड़कों का पिछले छह वर्षो से निर्माण नहीं हो रहा है. इस कारण स्थानीय आमजनों के आवागमन में कठिनाइयां तथा दुर्घटनाएं हो रही हैं. विधानसभा में भी मामला उठाया गया. 20 सूत्री योजना समिति की बैठक में चर्चा की गयी. एसीबी के आरक्षी अधीक्षक से भी मामले को लेकर मिला. परंतु एसीबी द्वारा संदर्भित विषय को जांच प्रतिवेदन के आधार पर निर्माण के लिए अनापत्ति प्राप्त नहीं होने के कारण निर्माण कार्य की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो पायी है.

कोट

एसीबी को पत्र लिखा गया है. तीन-तीन बार रिमाइंडर दिया गया है. एसीबी से 38 ग्रुप की सड़कों पर काम करने की अनुमति मांगी गयी है. इंटीग्रेटेड सड़क काफी पुरानी हो गयी है. इसपर स्ट्रीट लाइट नहीं जलने की सूचना है. चुकीं इंटीग्रेटेड सड़कों की जांच एसीबी कर रही है. इसलिए बिना एसीबी की अनुमति के इंटीग्रेटेड सड़कों पर कोई काम नहीं किया जा सकता है.

रवि राज शर्मा,

नगर आयुक्त

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