प्रमुख संवाददाता, देवघर : एसबीआइ आरसेटी सभागार में शनिवार को “कृषि और ग्रामीण समृद्धि पर बजट के बाद वेबिनार” का आयोजन किया गया. इसमें देवघर से भी कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के विभिन्न प्रतिनिधियों के साथ-साथ आरबीआइ, नाबार्ड, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राज्य सहकारी और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और डीसीसीबी, राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियां, कृषि विकास केंद्र के प्रतिनिधि शामिल हुए. वेबिनार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन भाषण को मौजूद प्रतिनिधियों ने सुना. भाषण में प्रधानमंत्री ने केंद्रीय बजट 2025-26 घोषणाओं के कार्यान्वयन पर चर्चा की. बताया गया कि केंद्र सरकार ने किसानों को सस्ते और आसान ऋण की सुविधा देने की योजना बनायी है और ऋण की राशि तीन से बढ़ाकर पांच लाख कर दी गयी है. ये ऋण संशोधित ब्याज सहायता योजना के तहत भारत के अन्नदाताओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिया जा रहा है. जानकारी दी गयी कि कृषि को 10 प्रमुख विकासात्मक क्षेत्रों में शामिल किया गया है, जो भारत की आर्थिक प्रगति को गति देने वाला एक महत्वपूर्ण इंजन है. मौजूद प्रतिनिधियों को जानकारी दी गयी कि 31 मार्च 24 तक 7.75 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड खाते हैं. अल्पकालिक ऋण जरूरतों को पूरा करके केसीसी योजना ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. केसीसी-संशोधित ब्याज अनुदान योजना किसानों को चार प्रतिशत की प्रभावी रियायती ब्याज दर पर ऋण दे रही है. किफायती ऋण तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, आरबीआइ ने जमानत-मुक्त केसीसी ऋण को 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दिया है. इससे फसल उत्पादन, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए किसानों की बढ़ी हुई कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने में काफी मदद मिलेगी. वेबिनार में जानकारी दी गयी कि केंद्र सरकार ने पिछले दशकों में एमआइएसएस के माध्यम से किसानों को 1.44 लाख करोड़ रुपये दिये. सरकार का लक्ष्य 2023-24 में कृषि अल्पकालिक ऋण को 9.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2029-30 तक 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है. इन उपायों के ज़रिए सरकार न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की सुलभता बढ़ा रही है, बल्कि किसानों को वित्तीय स्वतंत्रता भी दे रही है. हाइलाइट्स कृषि और ग्रामीण समृद्धि पर बजट के बाद वेबिनार में प्रधानमंत्री को लोगों ने सुना
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