प्रतिनिधि, देवीपुर ; प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत हटिया परिसर में काली मंदिर के पास एक बरगद के पेड़ के नीचे मंगलवार को पारंपरिक तरीके से लड़का-लड़की की देखा-देखी की रस्म संपन्न हुई. आधुनिक दौर में जहां शादियों के लिए बड़े-बड़े हॉल और आलीशान इंतजाम आम हो गये हैं. वहीं यह आयोजन सादगी, अपनापन और परंपरा की जीवंत झलक पेश करता नजर आया. दरअसल, इस रस्म में दोनों परिवार के सदस्य पेड़ के नीचे एकत्र हुए. बिना किसी तामझाम के लड़का और लड़की ने एक-दूसरे से बातचीत की और आपसी समझ को परखा. इस दौरान परिवार के बुजुर्ग भी मौजूद रहे, जिन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत वर-वधू की पसंद की पुष्टि की. स्थानीय लोगों का मानना है कि पेड़ के नीचे बैठकर इस तरह की रस्में निभाने से मानसिक शांति मिलती है और तनाव कम होता है. साथ ही, यह प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जुड़ाव को भी दर्शाता है. बरगद का पेड़ यहां केवल छाया देने वाला वृक्ष नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही संस्कृति, विश्वास और सामुदायिक एकता का प्रतीक माना जाता है. गौरतलब है कि तकनीकी युग में भी आदिवासी समाज अपनी परंपराओं को संजोए हुए है. यहां विवाह जैसे महत्वपूर्ण फैसले केवल दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरे समुदाय की सहमति से लिए जाते हैं. यह परंपरा यह संदेश देती है कि आधुनिकता के इस दौर में भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करना कितना आवश्यक है.
देवीपुर: आधुनिक युग में भी वृक्ष के नीचे होती है देखा-देखी की रस्म
देवीपुर : बरगद के पेड़ तले निभायी गयी पारंपरिक ‘देखा-देखी’ की रस्म, सादगी और संस्कृति की मिसाल
