देवघर से अमरनाथ पोद्दार की रिपोर्ट
देवघर. एमएमडीआर विधेयक को लेकर गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने मंगलवार को अपने आवास शिवधाम में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर झारखंड सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार में हिम्मत है तो झारखंड का कोयला रोककर दिखाये. देश के किसी सरकारी या निजी पावर प्लांट को इससे परेशानी नहीं होगी, क्योंकि दूसरे राज्यों और विदेशों से भी कोयला मंगाने का विकल्प है. डॉ दुबे ने कहा कि झारखंड के अलावा ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में भी कोयला उपलब्ध है. तेलंगाना में सिंगरेनी कोलियरीज और तमिलनाडु में नेवेली लिग्नाइट प्रमुख स्रोत हैं. झारखंड का कोयला महंगा होने पर पावर प्लांट दूसरे राज्यों से खरीद सकते हैं. इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से भी कोयला मंगाने की सुविधा है. जल मार्ग व आधारभूत संरचना विकसित हो चुकी है.
विपक्ष ने संसद में चर्चा नहीं होने देने का लगाया आरोप
डॉ दुबे ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों द्वारा खनिजों पर लिये जाने वाले उपकर और कर को लेकर कानून पारित किया है. प्रधानमंत्री से लेकर लोकसभा अध्यक्ष तक चर्चा की मांग करते रहे, लेकिन कांग्रेस, झामुमो और राजद ने सदन की कार्यवाही नहीं चलने दी. उन्होंने कहा कि विपक्ष के इंतजार में सरकार कानून पारित करना नहीं रोक सकती. कानून पारित होने के बाद झारखंड सरकार इसका विरोध कर रही है.
सांसद ने कहा कि खनिजों की रॉयल्टी और उपकर निर्धारण संविधान सभा के समय से राज्यों से विचार-विमर्श का विषय रहा है. 1957 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय पहली बार एमएमडीआर कानून बना. 1976 में इंदिरा गांधी और 1986 में राजीव गांधी के समय संशोधन हुए. संसद से कानून पारित होने के बाद उसे लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है.
कोयला चोरी को लेकर भी राज्य सरकार पर आरोप
सांसद ने धनबाद, पलामू, हजारीबाग और गोड्डा में कोयला चोरी का आरोप लगाया. उन्होंने उत्पादन और उठाव पर गंभीरता से विचार की जरूरत बतायी. कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है और दुनिया कोयले का उपयोग घटा रही है. ऑस्ट्रेलिया व इंडोनेशिया सस्ते दर पर भारत को कोयला देने को तैयार हैं.
कोयला उठाव प्रभावित हुआ तो राजस्व पर पड़ेगा असर
डॉ दुबे ने कहा कि खनिजों की रॉयल्टी और उपकर से राज्य को राजस्व मिलता है. कोयले का उठाव और बिक्री प्रभावित होने पर राजस्व पर भी असर पड़ेगा. उन्होंने राज्य सरकार की वित्तीय व्यवस्था और विभिन्न योजनाओं के खर्च पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगाये.
एमएमडीआर कानून पर जनमत संग्रह की दी चुनौती
डॉ दुबे ने झामुमो और कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि एमएमडीआर कानून पर जनता के बीच जाना है तो जनमत संग्रह कराया जा सकता है. इससे पता चलेगा कि जनता क्या चाहती है. आंदोलन और आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी के बजाय जनता के बीच पक्ष रखना चाहिए. मौके पर भाजपा जिला अध्यक्ष सचिन रवानी, जिला प्रभारी यदुनंदन पाठक, महामंत्री अभय आनंद झा, जिला उपाध्यक्ष मुकेश पाठक, भागलपुर के विधायक रोहित पांडेय, पंकज सिंह भदोरिया, विजया सिंह, मिथिलेश सिन्हा, राजकिशोर गुप्ता, गुरु दुबे, अमर पासवान व अमृत मिश्रा मौजूद थे.
