Deoghar news : साइबर ठगी के मामले में साक्ष्य के अभाव में 10 आरोपितों को किया रिहा

साइबर ठगी के मामले में साक्ष्य नहीं मिलने पर 10 आरोपितों को कोर्ट ने रिहा कर दिया. 30 अगस्त 2019 को साइबर थाने की तत्कालीन डीएसपी नेहा बाला के प्रतिवेदन पर मुकदमा दर्ज हुआ था.

विधि संवादादता, देवघर . साइबर ठगी के केस संख्या 107/2020 सरकार बनाम आलम अंसारी व अन्य मामले की सुनवाई पूरी की गयी, जिसके बाद इस मामले के 10 नामजद आरोपितों आलम अंसारी, शमीम अंसारी, इमरान अंसारी, माइकल अंसारी, मनुवर अंसारी, अंसुर अंसारी, मकसूद अंसारी, शरीफ अंसारी व असलम अंसारी को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया गया. सभी आरोपित खागा थाना के रघुनाथपुर गांव के रहने वाले हैं और साइबर थाना देवघर में 30 अगस्त 2019 को साइबर थाना की तत्कालीन डीएसपी नेहा बाला के प्रतिवेदन पर मुकदमा दर्ज हुआ था. केस दर्ज होने के बाद अनुसंधान पूरी की गयी और आरोपितों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल किया गया. इसके बाद केस का ट्रायल एडीजे दो सह स्पेशल कोर्ट साइबर क्राइम केस अशोक कुमार की अदालत में हुआ, जिसमें अभियोजन पक्ष से एक भी गवाही घटना के संदर्भ में नहीं दी गयी. स्पेशल कोर्ट में अभियोजन एवं बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनी गयी, जिसके बाद सभी आरोपितों को रिहा कर दिया गया. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से सरकारी अधिवक्ता शिवाकांत मंडल व बचाव पक्ष से अधिवक्ता मोबिन अंसारी ने पक्ष रखा.

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By Falguni marik

विगत 32 वर्षों से प्रभात खबर में पत्रकारिता करते आ रहा हूं. विशेष तौर पर कोर्ट से संबंधित खबरों के अलावा श्रावणी विशेषांक -बिल्व पत्र में धार्मिक आलेख लेखन, दुर्गापूजा के अवसर पर निकाली गयी दुर्वाक्षत में धार्मिक लेख लिखने, सामयिक कॉलम कोर्ट कचहरी का चक्कर, क्राइम स्टोरी आदि लेखन का अनुभव है. साथ ही लोक भाषा खोरठा में कविता, कहानी लेखन का अनुभव है. झारखंड अधिविध परिषद रांची के वर्ग अष्टम के पाठ्यक्रम में तथा आचार्य विनोवा भावे विश्वविद्यालय में बीए की कक्षा के पाठ्यक्रम में कविता शामिल हो चुकी है. विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कविताएं, कहानियां व आलेखों का भी प्रकाशन हो चुका है.

प्रभात खबर में विगत 32 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव. विशेष तौर पर अदालत की खबरों पर पकड़ है. इसके अलावा विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं पर आलेख छपते रहा है. बिल्व पत्र श्रावणी विशेषांक में धार्मिक आलेख, सामयिक कॉलम- कोर्ट कचहरी का चक्कर, क्राइम स्टोरी आदि लेखन करते रहे हैं. लोक भाषा खोरठा की जानकारी है एवं इनकी कविता झारखंड अधिविध परिषद में वर्ग अष्टम तथा बिनोवा भावे विश्वविद्यालय में बीए पाठ्यक्रम में शामिल है.

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