देवघर : ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान धमाका और गुजरात सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी वाले इ-मेल भेजने के मामले में देवघर से गुलशन कुमार सिंह की गिरफ्तारी के बाद गुजरात साइबर क्राइम पुलिस ने पूरे नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा किया है. गांधीनगर, गुजरात साइबर क्राइम एसपी विवेक वेदा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जांच में देवघर, भागलपुर से लेकर बांग्लादेश तक नेटवर्क के तार सामने आये हैं.
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास 5,13,847 यूनिक जी-मेल आइडी और पासवर्ड का विशाल डेटाबेस मिला है. इनका इस्तेमाल सरकारी संस्थानों, स्कूलों, अदालतों समेत विभिन्न स्थानों पर धमकी भरे इ-मेल भेजने के लिए किये जाने की आशंका है.
देवघर से गिरफ्तारी के बाद खुला नेटवर्क
एसपी विवेक वेदा के अनुसार, गुजरात सचिवालय और ब्रिक्स सम्मेलन से संबंधित धमकी भरे इ-मेल की जांच के दौरान तकनीकी सुराग सबसे पहले बिहार के भागलपुर तक पहुंचे. वहां से पुलिस ने रोशन कुमार राय को पकड़ा. उसके डिवाइस से धमकी वाला इ-मेल भेजे जाने की जानकारी मिली.
पूछताछ में रोशन ने पुलिस को गुलशन कुमार सिंह का नाम बताया. इसके बाद गुजरात पुलिस की टीम देवघर पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से नगर थाना क्षेत्र से गुलशन को गिरफ्तार किया. उसे कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर गुजरात ले जाया गया.
गुलशन मूल रूप से बिहार के जमुई का रहने वाला है और पुलिस के अनुसार सॉफ्टवेयर डेवलपर है. एसपी ने बताया कि गुलशन इस पूरे नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था और इ-मेल आइडी, पासवर्ड तथा अन्य डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने का काम करता था.
दो दिन में 14 हजार से ज्यादा इ-मेल आइडी
विवेक वेदा के अनुसार, गुलशन वर्ष 2022 से इस गतिविधि में सक्रिय था. उसने बड़ी संख्या में जी-मेल आइडी तैयार करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर या टूल विकसित किया था. पुलिस के मुताबिक, इस टूल की मदद से मोबाइल नंबर या ओटीपी सत्यापन के बिना बड़ी संख्या में इ-मेल आइडी तैयार की जा सकती थी.
एसपी ने बताया कि केवल पिछले दो दिनों में ही गुलशन ने 14 हजार से अधिक नयी इ-मेल आइडी तैयार की थीं. जांच में उसके पास से कुल 5,13,847 यूनिक इ-मेल आइडी और पासवर्ड का डेटाबेस सामने आया है. पुलिस अब इस डेटाबेस का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया, इसकी पड़ताल कर रही है.
भागलपुर के रोशन को दी गयीं आइडी और निर्देश
एसपी वेदा के अनुसार, गुलशन सीधे धमकी भरे इ-मेल भेजने के बजाय नेटवर्क के दूसरे लोगों को इ-मेल आइडी, पासवर्ड और संबंधित सामग्री उपलब्ध कराता था. भागलपुर के रोशन कुमार राय की भूमिका इसी स्तर पर सामने आयी है.
पुलिस के अनुसार, रोशन को इ-मेल आइडी और निर्देश उपलब्ध कराये गये थे और इसके बदले उसे भुगतान किया गया. इस तरह देवघर में बैठे गुलशन से लेकर भागलपुर में इ-मेल भेजने वाले व्यक्ति तक काम को अलग-अलग स्तर पर संचालित किये जाने की बात जांच में सामने आयी है. पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग जुड़े हैं.
वीपीएन और प्रॉक्सी से छिपाने की कोशिश
एसपी विवेक वेदा के अनुसार, आरोपियों ने अपनी डिजिटल पहचान और वास्तविक लोकेशन छिपाने के लिए वीपीएन, प्रॉक्सी और दूसरे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया. इसका उद्देश्य इ-मेल के वास्तविक स्रोत तक जांच एजेंसियों की सीधी पहुंच को मुश्किल बनाना था.
गुजरात साइबर सेल अब अलग-अलग तकनीकी स्रोतों से मिले डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर रही है. जांच का दायरा केवल ब्रिक्स सम्मेलन से जुड़े धमकी वाले इ-मेल तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में पहले भेजे गये इसी तरह के धमकी भरे संदेशों से भी संभावित कनेक्शन खंगाला जा रहा है.
बांग्लादेश तक पहुंचे तार, फंडिंग की जांच
एसपी वेदा ने बताया कि जांच के दौरान नेटवर्क के बांग्लादेश कनेक्शन के संकेत मिले हैं. पुलिस के अनुसार, बांग्लादेश में बैठे कुछ लोगों से इस नेटवर्क को वित्तीय मदद मिलने की बात सामने आयी है.
आरोपियों के पास मौजूद इ-मेल आइडी और पासवर्ड का डेटाबेस बांग्लादेश में बैठे लोगों के साथ साझा किये जाने की भी जांच की जा रही है. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि बांग्लादेश में मौजूद कथित संपर्कों की भूमिका क्या थी और नेटवर्क को किस तरह की आर्थिक सहायता दी जा रही थी. इस कड़ी की पुष्टि और विस्तृत भूमिका का पता तकनीकी तथा वित्तीय जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा.
दो क्रिप्टो वॉलेट, करोड़ों के लेनदेन की पड़ताल
एसपी के अनुसार, जांच में आरोपियों से जुड़े दो प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट की जानकारी मिली है. इन वॉलेट के जरिये करोड़ों रुपये मूल्य के क्रिप्टो लेनदेन की बात सामने आयी है.
पुलिस अब इन वॉलेट की पूरी लेनदेन हिस्ट्री खंगाल रही है, ताकि भुगतान करने वालों और भुगतान पाने वालों की पहचान हो सके. जांच में यह भी सामने आया है कि इ-मेल आइडी, पासवर्ड और संबंधित डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराने के बदले क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भुगतान किया जाता था. नेटवर्क में शामिल लोगों तक भुगतान पहुंचाने के लिए डिजिटल वाउचर कोड के इस्तेमाल की जानकारी भी पुलिस को मिली है.
देवघर का किराये का कमरा बना था ऑपरेशन सेंटर
गुजरात साइबर क्राइम एसपी के अनुसार, गुलशन ने देवघर में किराये का कमरा लिया था और वहीं से इंटरनेट व कई डिजिटल उपकरणों के माध्यम से नेटवर्क से जुड़े काम संचालित करता था. यही कमरा जांच में इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी के रूप में सामने आया है.
गुजरात पुलिस अब देवघर से बरामद डिजिटल साक्ष्यों, गुलशन के उपकरणों और उसके संपर्कों की जांच कर रही है. इसके साथ ही भागलपुर से गिरफ्तार रोशन के उपकरणों से मिले डेटा का भी मिलान किया जा रहा है.
देशभर के धमकी वाले इ-मेल से मिलाया जा रहा डेटा
एसपी विवेक वेदा ने बताया कि गुजरात साइबर सेल अब देश के अलग-अलग हिस्सों में पिछले समय में भेजे गये धमकी भरे इ-मेल का डेटा खंगाल रही है. इसका मकसद यह पता लगाना है कि क्या उन मामलों के पीछे भी यही नेटवर्क था.
फिलहाल जांच की तीन अहम कड़ियां सामने आयी हैं: देवघर में बैठा गुलशन, भागलपुर से गिरफ्तार रोशन और बांग्लादेश से जुड़े कथित वित्तीय संपर्क. 5.13 लाख इ-मेल आइडी और पासवर्ड वाले डेटाबेस तथा क्रिप्टो लेनदेन की जांच से इस नेटवर्क की वास्तविक पहुंच का पता लगाने की कोशिश की जा रही है. गुजरात पुलिस की आगे की तकनीकी जांच में ही यह स्पष्ट होगा कि इस नेटवर्क ने देश में अब तक कितने धमकी भरे इ-मेल भेजे और इसमें देश-विदेश के कितने लोग शामिल हैं.
