संजीत/मिथिलेश, देवघर : देवघर जिले में बच्चों और माताओं को पोषण व प्रारंभिक शिक्षा से जोड़ने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भवन का संकट बना हुआ है. जिले में स्वीकृत और संचालित 1573 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 430 केंद्र ऐसे हैं, जिनके पास अपना सरकारी भवन नहीं है या भवन जर्जर हो चुका है. इन केंद्रों का संचालन फिलहाल अन्य सरकारी भवन, किराये के भवन, विद्यालय, पंचायत भवन, सभा भवन और सामुदायिक भवनों में किया जा रहा है. इस स्थिति को देखते हुए जिला समाज कल्याण विभाग ने अब इन केंद्रों के लिए जमीन उपलब्ध कराने की कवायद तेज कर दी है. जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने 22 अगस्त 2026 को सभी अंचल अधिकारियों और प्रखंड विकास पदाधिकारियों को पत्र भेजकर भूमि संबंधी रिपोर्ट मांगी है.
35 केंद्रों का मनरेगा से निर्माण जारी
विभागीय पत्र के अनुसार, भवन विहीन या जर्जर 430 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 35 केंद्रों के भवन का निर्माण मनरेगा के अधीन निर्माणाधीन है. वहीं 60 केंद्रों के लिए भूमि पहले से उपलब्ध है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में केंद्र ऐसे हैं, जहां भवन निर्माण के लिए जमीन की जरूरत है. अब प्रशासन इन केंद्रों के लिए उपयुक्त सरकारी अथवा उपलब्ध भूमि की तलाश करेगा.
मुखिया से पंचायत सचिव तक करेंगे जांच
भूमि उपलब्धता की वास्तविक स्थिति जानने के लिए प्रखंड स्तर पर मुखिया, पंचायत सचिव, वार्ड पार्षद, पंचायत सेवक और पर्यवेक्षक आदि से जांच कराने का निर्देश दिया गया है. अधिकारियों को भूमि की उपलब्धता की जांच कर सत्यापन के बाद प्रतिवेदन देने को कहा गया है.
सीडीपीओ की होगी व्यक्तिगत जवाबदेही
पत्र की प्रतिलिपि सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों को भी भेजी गयी है. वहीं संबंधित बीडीओ और सीओ से समन्वय स्थापित कर आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए स्पष्ट अनुशंसा के साथ भूमि प्रतिवेदन शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा है. इसके लिए सीडीपीओ को व्यक्तिगत जवाबदेही लेने को कहा गया है.
