पांच माह से गायब सरकारी चीनी, रक्षाबंधन में भी फीकी पड़ी गरीबों के घर की मिठास

देवघर में अंत्योदय कार्डधारियों को 5 महीने से सरकारी चीनी नहीं मिली है. रक्षाबंधन पर भी गरीब परिवार बाजार से महंगी चीनी खरीदने को मजबूर हैं. पढ़े पूरी खबर.

देवघर : गरीब परिवारों के घर की चाय और अन्य पकवानों में मिठास घोलने वाली सरकारी चीनी पिछले पांच माह से गायब है. देवघर में जनवितरण प्रणाली के माध्यम से अंत्योदय अन्न योजना के प्रत्येक कार्डधारी को हर माह रियायती दर पर एक किलो चीनी देने का प्रावधान है. लेकिन चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अब तक न तो चीनी की खेप पहुंची और न ही इसका आवंटन जनवितरण प्रणाली की दुकानों तक उपलब्ध कराया गया है.

बाजार से 70 रुपये किलो चीनी खरीदने की मजबूरी

सरकारी चीनी की आपूर्ति नहीं होने के कारण अति-गरीब परिवारों को बाजार से करीब 70 रुपये किलो की दर से चीनी खरीदनी पड़ रही है. इससे इन परिवारों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.

विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में अंत्योदय अन्न योजना के 14,833 कार्डधारी हैं. इन कार्डों से कुल 62,771 सदस्य जुड़े हैं. ऐसे में पांच माह से सरकारी चीनी की आपूर्ति नहीं होने का सीधा असर हजारों गरीब परिवारों पर पड़ रहा है.

न आवंटन मिला, न स्टॉक पहुंचा

जिला आपूर्ति कार्यालय, देवघर का कहना है कि चीनी का न तो आवंटन प्राप्त हुआ है और न ही स्टॉक मिला है. इसी वजह से जनवितरण प्रणाली की दुकानों में चीनी की खेप नहीं पहुंची है.

रक्षाबंधन पर भी फीकी रही मिठास

रक्षाबंधन के दौरान चीनी की बाजार दर बढ़ने से मिठाइयों के दाम भी चढ़ गये. ऐसे में गरीब परिवारों के लिए त्योहार की मिठास भी बजट से बाहर हो गयी.

अंत्योदय परिवारों को जब सरकार ने रियायती दर पर चीनी उपलब्ध कराने का प्रावधान किया है, तो पांच माह से इसकी आपूर्ति बाधित रहना चिंता का विषय है. कार्डधारियों ने विभाग से जल्द से जल्द चीनी का आवंटन कर जनवितरण प्रणाली दुकानों के माध्यम से वितरण शुरू कराने की मांग की है, ताकि गरीब परिवारों को बाजार की महंगी चीनी खरीदने से राहत मिल सके.


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लेखक के बारे में

By विजय कुमार

विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव है. पिछले 22 वर्षों से लगातार प्रभात खबर से जुड़ा हूं. शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर सिर्फ ग्राउंड रिपोर्टिंग ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और जनहित की आवाज बनने का काम किया. बिजली, नगर निगम व कृषि से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति सामने लाकर नीति निर्माण में योगदान दिया. पत्रकारिता की पढ़ाई महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से की.

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