चाटर्ड एकाउंटेंट कोर्स में होगा बदलाव

देवघर : द चार्टर्ड अकांउटेंटस ऑफ इंडिया अपने सीए (चाटर्ड एकाउंटेंट) कोर्स में बदलाव करने जा रहा है़ यह बदलाव लगभग एक दशक के बाद किया जा रहा है़ आइसीएआइ के अनुसार इस बदलाव का उद्देश्य करिकुलम और परीक्षा पैटर्न को बेहतर बनाना है़ नये बदलाव के तहत सिलेबस में नयापन, परीक्षा पैटर्न और सिलेबस […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
देवघर : द चार्टर्ड अकांउटेंटस ऑफ इंडिया अपने सीए (चाटर्ड एकाउंटेंट) कोर्स में बदलाव करने जा रहा है़ यह बदलाव लगभग एक दशक के बाद किया जा रहा है़ आइसीएआइ के अनुसार इस बदलाव का उद्देश्य करिकुलम और परीक्षा पैटर्न को बेहतर बनाना है़ नये बदलाव के तहत सिलेबस में नयापन, परीक्षा पैटर्न और सिलेबस में नये विषयों को शामिल करने जैसी बातें हैं. एक्सपर्ट के अनुसार वैसे तो समय-समय पर आइसीएआइ द्वारा बाजार को ध्यान में रखते हुए बदलाव किये जाते हैं. लेकिन इस बार ग्लोबल स्तर पर जरूरत को देखते हुए बदलाव किये जा रहे हैं.
इंट्री लेवल होगा और कठिन
नये बदलाव के तहत कई बातें देखने को मिलेंगी़ इसमें इंट्री लेवल को थोड़ा और कठिन किया जायेगा़ इसके अलावा उम्मीदवारों को अब ऑब्जेक्टिव टाइप सवालों के साथ-साथ सब्जेक्टिव टाइप सवालों के जवाब भी देने होंगे़ इंटरमीडिएट लेवल पर एक नया विषय जोड़ा जा रहा है़ यह विषय इकोनॉमिक्स का होगा़ फाइनल लेवल पर इलेक्टिव विषय के रूप में कुछ विषयों को जोड़ा गया है, जो सिलेबस का आठवां विषय कहलायेगा़
इन इलेक्टिव विषयों की परीक्षा उम्मीदवारों को ओपन बुक फॉरमेट और केस स्टडी के रूप में देना होगा़ इससे पहले उम्मीदवार को इंटर लेवल पास करने के बाद तीन साल की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के लिए रजिस्टर करना होता है़ पहले यह रजिस्ट्रेशन किसी एक ग्रुप में पास होने के बाद भी किया जा सकता था, पर अब तीन साल के प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के लिए दोनों ग्रुप को पास करना अनिवार्य होगा़ फाउंडेशन कोर्स से आने वाले विद्यार्थी को अब साढ़े चार साल लगेंगे. जबकि डायरेक्ट एडमिशन लेनेवाले को सीए कोर्स साढ़े तीन साल में पूरे होंगे़ इसके अतिरिक्त 12वीं अपियरिंग विद्यार्थी भी फाउंडेशन कोर्स में रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे़
आठवां पेपर के रूप में पढ़ाई
फाइनल लेवल पर इलेक्टिव विषय के रूप में कुछ विषयों को जोड़ा गया है, जो सिलेबस का आठवां विषय कहलायेगा़ इन विषयों में शामिल हैं : रिस्क मैनेजमेंट, इंटरनेशनल टैक्सेशन, फाइनांसियल सर्विस व कैपिटल मार्केट, ग्लोबल फिनांस रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड, इकोनोमिक लॉ व मल्टी डिसिप्लीनरी केस़
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