देवघर: जिले में बाल अधिकार कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं और पुलिस-प्रशासन समेत इस कानून के संरक्षण में लगी संस्थाओं को इसकी भनक तक नहीं हैं. राज्य सरकार व केंद्र सरकार द्वारा बाल संरक्षण कानून समेत बाल विवाह रोकने के लिये हर साल करोड़ों रुपये खर्च भी किया जा रहा है. बावजूद लगता […]
ByPrabhat Khabar Digital Desk|
देवघर: जिले में बाल अधिकार कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं और पुलिस-प्रशासन समेत इस कानून के संरक्षण में लगी संस्थाओं को इसकी भनक तक नहीं हैं. राज्य सरकार व केंद्र सरकार द्वारा बाल संरक्षण कानून समेत बाल विवाह रोकने के लिये हर साल करोड़ों रुपये खर्च भी किया जा रहा है. बावजूद लगता है कि इस जिले में यह दोनों कानून फाइलों तक ही सिमट कर रह गयी है.
अब भी सुदूर ग्रामीण इलाकों की बात करें तो पढ़ने-खेलने की उम्र में बच्चियों को परिवार वाले शादी के बंधन में बांध रहे हैं. और तो और इन बच्चियों को शादी का मायने-मतलब भी सही-सही समझ नहीं हो पाता है कि परिजन उन्हें ससुराल तक भेजने के लिये भी मजबूर करते हैं. इसके बाद ऐसी बच्चियां आत्महत्या तक घातक कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं.
ऐसी घटनाओं के बावजूद भी इन बच्चियों को जीने के अधिकार दिलाने के लिये मदद हेतु न ही किसी सामाजिक संस्थान आगे आये हैं और न ही शासन-प्रशासन व सरकार के नुमाइंदे तक को इसकी खबर है. इस हालत में इन बच्चियों को अधिकार दिलाने के लिये राष्ट्रीय व राज्य मानवाधिकार आयोग के भी किसी ने कभी प्रयास नहीं किया है. ऐसे दो मामले तो फिलहाल सामने आये हैं किंतु जिले में सव्रे कराया जाय तो दर्जनों घटनाएं देखने को मिल सकती है. पुत्री होना समाज में अभिशाप कहा जाय या परिजनों की मजबूरी कि लोग पढ़ने-खेलने की उम्र में ही हाथ पीले कराने को बाध्य हैं.
केस स्टडी-1
मोहनपुर थाना क्षेत्र में एक 12 वर्षीय बच्ची जिसे खेलने-पढ़ने की उम्र में परिजनों ने एक-डेढ़ साल पूर्व ही बाल विवाह कराया था. जिस वक्त उसकी शादी हुई, तब वह पांचवीं कक्षा में स्कूल जाती थी. शादी के बाद उसे परिजनों ने पढ़ाई से नाता ही तोड़वा दिया. शादी के बाद वह घर में रहती थी तो भाई यह कह कर ताना मारते थे कि अब उसका घर यहां नहीं ससुराल में है. यह कह कभी-कभी उसे मारपीट भी किया जाता था. ऐसी हरकत से तंग आकर उसने जिंदगी त्यागने की सोच ली और ढ़ील मारक दवा खा लिया. गंभीर हालत में परिजनों ने उसे बुधवार देर रात में शहर के एक प्राइवेट क्लिनिक में भरती कराया है. उक्त शादीशुदा नाबालिग को आइसीयू में भरती कर इलाज कराया जा रहा है. अब तक उक्त बच्ची के आंख से आंसू नहीं सूख रहे हैं. बच्ची को अस्पताल के डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी यह कह कर दिलासा दे रहे हैं कि उसे ससुराल जाने नहीं देंगे. पढ़ने के लिये स्कूल भेजने की व्यवस्था करायेंगे तब कभी-कभी वह चुप हो जाती है. सूत्रों की मानें तो इस बच्ची की ससुराल भी मोहनपुर इलाके में ही है.
केस स्टडी-2
सारठ थाना क्षेत्र की इस नाबालिग की शादी 13 साल में करायी गयी है. इसका दूल्हा भी अब भी नाबालिग है, जिसका उम्र 17 साल है. दूल्हे का घर भी सारठ थाना क्षेत्र में ही है. शादीशुदा यह बच्ची सातवीं में थी, तभी परिजनों ने हाथ पीले करा दिये थे. वहीं दूल्हा आठवीं कक्षा में पढ़ रहा था. दोनों परिवारों ने अपनी खुशी के खातिर दोनों की जीवन को दलदल में धकेल दिया. इस नाबालिग ने भी रहस्यमय परिस्थिति में बुधवार रात में विषैला पदार्थ खा ली थी. परिजनों ने इसे भी इलाज के लिये शहर के उसी प्राइवेट क्लिनिक में लाया है, जहां मोहनपुर की शादीशुदा नाबालिग का इलाज कराया जा रहा है. इसे भी आइसीयू में इलाज कराया जा रहा है. दोनों के परिजन भी साथ-साथ हैं. पूछने पर परिजन अपनी मजबूरी गिनाते हैं.
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