37 वर्ष बाद कोर्ट से मिला न्याय, हत्या के चार दोषियों को आजीवन कारावास

देवघर: सारठ के चिकनियां गांव में महिला की पीट-पीट कर हत्या मामले में 37 वर्ष बाद फैसला आया है. मंगलवार को सेशन जज चार लोलार्क दुबे की अदालत ने चारों अभियुक्त हरिशंकर पोद्दार, खुदू पोद्दार, विष्णु महतो व हुसैनी मियां को हत्या का दोषी पाया तथा सश्रम आजीवन कारावास की सजा दी गयी. साथ ही […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

देवघर: सारठ के चिकनियां गांव में महिला की पीट-पीट कर हत्या मामले में 37 वर्ष बाद फैसला आया है. मंगलवार को सेशन जज चार लोलार्क दुबे की अदालत ने चारों अभियुक्त हरिशंकर पोद्दार, खुदू पोद्दार, विष्णु महतो व हुसैनी मियां को हत्या का दोषी पाया तथा सश्रम आजीवन कारावास की सजा दी गयी. साथ ही प्रत्येक दोषी को 55 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया. दोषियों द्वारा जुर्माना की राशि नहीं भुगतान नहीं करने पर तीन माह अलग से जेल की सजा काटनी होगी. घटना पांच जून 1980 को हुई थी.

इसमें जमीन विवाद में दोषियों ने टांगी से वार कर सरस्वती देवी की हत्या कर दी थी. इसमें 11 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था. ट्रायल के दौरान कुछ अभियुक्तों की मौत हो गयी. इस कोर्ट में ट्रायल चार अभियुक्तों का हुआ जिसे दोषी पाकर सश्रम उम्रकैद की सजा दी गयी. इस मामले में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक ब्रह्मदेव पांडेय व बचाव पक्ष से अधिवक्ता उत्तम कुमार सिंह ने पक्ष रखा. यह फैसला भरी अदालत में सुनाया गया व काफी संख्या में परिजन कोर्ट के बाहर मौजूद थे. ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष से 15 लोगों ने गवाही दी व दोष सिद्ध करने में सफल हुए. मृतका के पति हुरो पोद्दार को पुनर्वासन के लिए दो लाख रुपये धार 357 ए (2) के तहत देने का आदेश दिया, जो डालसा के माध्यम से दिलायी जायेगी.

1980 में हुई थी घटना
5 जून, 1980 को तत्कालीन दुमका जिला अंतर्गत सारठ के चिकनियां गांव में जमीन के लिए खूनी संघर्ष हुआ था. आरोपितों ने टांगा, कुल्हाड़ी, लाठी, रड आदि लेकर खेत पर पहुंच गये थे, जहां हुरो पोद्दार, माेती पोद्दार समेत उनके परिजन खेत जोत रहे थे. आरोपितों ने कुल्हाड़ी से वार कर कई लोगाें को जख्मी कर दिया था. इस दौरान गंभीर रूप से जख्मी सरस्वती देवी की आरोपितों तब तक घेरे रखा था जब तक की उनकी मौत नहीं हो गयी. दर्ज मुकदमा में कहा गया है कि खून लगी मिट्टी को जोत कर उस पर चौंकी चला दिया था व साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया था. घटना के संदर्भ में सारठ थाना में कांड संख्या 3/1980 दर्ज कर भादवि की धारा 147, 148,149, 302, 201, 34 लगायी गयी थी. इसमें 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था. अनुसंधान कर पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया. पश्चात मामले का ट्रायल हुआ. कानूनी दावं-पेंच में यह मामला उलझा रहा. अंतत: 37 वर्ष के बाद फैसला आया व मृतका के पति व परिजन को न्याय मिला.

जिन धाराओं में पाया दोषी
इस मामले के आरोपितों को भादवि की धारा 302 में सश्रम आजीवन कारावास के अलावा 324 व 148 दो-दो वर्ष तथा 201 में दोषी पाकर पांच-पांच वर्ष की सश्रम सजा दी गयी. सभी सजाएं साथ-साथ चलेगी. सभी आरोपित लगभग 60 वर्ष के हैं.
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