चतरा. परिसीमन के मुद्दे को लेकर आदिवासी संगठनों ने 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में महाजुटान करने का निर्णय लिया है. इसी को लेकर राज्य के पूर्व मंत्री बंधु तिर्की बुधवार शाम चतरा पहुंचे और आदिवासी अगुआ व सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर परिसीमन के संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की.
इस मौके पर उन्होंने कहा कि परिसीमन होना चाहिए, लेकिन केवल जनसंख्या को आधार बनाकर परिसीमन किये जाने से झारखंड के आदिवासी समुदाय को नुकसान हो सकता है. उन्होंने कहा कि देश में लोकसभा व विधानसभा सीटों में यदि करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जाती है, तो झारखंड में भी अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों में उसी अनुपात में वृद्धि होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय की चिंता इस बात को लेकर है कि यदि परिसीमन में केवल वर्तमान जनसंख्या को आधार बनाया गया, तो आदिवासी बहुल क्षेत्रों की स्थिति प्रभावित हो सकती है.
पूर्व मंत्री ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण, पलायन व विस्थापन जैसे कई कारणों से कुछ क्षेत्रों में आदिवासी आबादी का अनुपात कम हुआ है. ऐसे में केवल वर्तमान जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन किये जाने से आदिवासी आरक्षित सीटों की संख्या घटने की आशंका है. आदिवासी एकता मंच के चतरा अध्यक्ष महेश बांडो के नेतृत्व में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आदिवासी समाज के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया.
बैठक में 30 अगस्त के कार्यक्रम को सफल बनाने पर भी चर्चा की गयी. मौके पर शशि पन्ना, नीरज भोगता, कमेशर भोगता, विजय गंझू, सोमर उरांव, सुशील लकड़ा, लुकस बांडो, जेमस मिंज, दिव्या भोगता, दानभूषण लकड़ा, मादी उरांव, राजेश कच्छप समेत कई लोग उपस्थित थे.
