हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट
Hazaribagh News: झारखंड सूचना प्रौद्योगिकी संवर्धन एजेंसी (जेएपी-आईटी) के माध्यम से विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों को पिछले तीन महीनों से मानदेय नहीं मिला है. हजारीबाग जिले में ऐसे कर्मियों की संख्या 500 से अधिक है, जबकि पूरे राज्य में इनकी संख्या 7,000 से अधिक बताई जाती है. मार्च 2026 से लंबित वेतन के कारण कर्मियों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है. लगातार तीन महीने तक भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है और वे सरकार व संबंधित विभागों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं.
मार्च से लंबित है मानदेय
जेएपी-आईटी के माध्यम से कार्यरत कर्मियों में कंप्यूटर ऑपरेटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, ड्राइवर, मेडिकल स्टाफ सहित कई अन्य श्रेणियों के कर्मचारी शामिल हैं. इन कर्मियों को मार्च, अप्रैल और मई 2026 का मानदेय अब तक नहीं मिला है. नियमित रूप से कार्यालयों में अपनी सेवाएं देने के बावजूद भुगतान नहीं होने से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है. कर्मचारियों का कहना है कि वेतन नहीं मिलने के कारण रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया है.
परिवार चलाने में हो रही कठिनाई
वेतन नहीं मिलने का सबसे अधिक असर कर्मचारियों के परिवारों पर पड़ रहा है. कई कर्मियों ने बताया कि बच्चों की स्कूल फीस समय पर जमा नहीं हो पा रही है. घरेलू खर्चों को पूरा करने के लिए उन्हें उधार लेना पड़ रहा है. कुछ परिवारों में बुजुर्ग माता-पिता और बीमार सदस्य हैं, जिनके इलाज और दवाओं का खर्च भी प्रभावित हो गया है. आर्थिक तंगी के कारण कई कर्मचारी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं.
सेवा विस्तार नहीं होने से अटका भुगतान
आउटसोर्सिंग कर्मियों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष मार्च महीने में उनके सेवा विस्तार की प्रक्रिया पूरी की जाती है. सेवा विस्तार मिलने के बाद अगले एक वर्ष तक वे अपनी सेवाएं जारी रखते हैं और नियमित भुगतान होता है. लेकिन, वर्ष 2026 में मार्च माह से सेवा विस्तार की प्रक्रिया लंबित है. इसी वजह से मानदेय भुगतान भी रुका हुआ है. कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सेवा विस्तार की औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, तब तक वेतन भुगतान की संभावना भी कम है.
सरकारी कार्यालयों में आउटसोर्सिंग पर बढ़ी निर्भरता
राज्य के अधिकांश सरकारी विभागों और कार्यालयों में लंबे समय से नियमित नियुक्तियां नहीं हुई हैं. ऐसे में सरकारी कामकाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए आउटसोर्सिंग कर्मियों की सेवाएं ली जा रही हैं. विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से इन कर्मचारियों को आवश्यकता के अनुसार नियुक्त किया गया है. कई महत्वपूर्ण कार्यालयों में डाटा प्रबंधन, तकनीकी कार्य, दस्तावेजों का संधारण और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां इन्हीं कर्मियों के भरोसे संचालित हो रही हैं. इसके बावजूद समय पर वेतन नहीं मिलना कर्मचारियों के लिए बड़ी समस्या बन गया है.
सरकार और विभाग के प्रति बढ़ रहा असंतोष
आउटसोर्सिंग कर्मियों का आरोप है कि उनकी समस्याओं को लेकर न तो संबंधित विभाग गंभीर है और न ही सरकार की ओर से कोई ठोस पहल की जा रही है. हजारीबाग ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य जिलों में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारी भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं. कर्मचारियों का कहना है कि समय पर मानदेय भुगतान सुनिश्चित करना सरकार और विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन उनकी परेशानियों की अनदेखी की जा रही है.
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समाधान की मांग तेज
तीन महीने से लंबित वेतन को लेकर कर्मियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है. कर्मचारी जल्द से जल्द सेवा विस्तार की प्रक्रिया पूरी कर लंबित मानदेय भुगतान करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे. फिलहाल, हजारों आउटसोर्सिंग कर्मी सरकार के फैसले और भुगतान प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं.
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