जोरी से अभिमन्यु सिंह की रिपोर्ट जोरी(चतरा). वशिष्ठ नगर थाना परिसर से महज 100 मीटर दूर चतरा-डोभी मुख्य मार्ग (NH-22) पर स्थित राज्य संपोषित प्लस टू उच्च विद्यालय आज प्रशासनिक उदासीनता के कारण खंडहर में तब्दील हो चुका है. वर्ष 1948 में स्थानीय बुद्धिजीवियों के प्रयास और रामगढ़ राज के राजा कामाख्या नारायण सिंह के सहयोग से इस विद्यालय की नींव पड़ी थी.
1960 में इसका सरकारीकरण हुआ और 2023 में इसे प्लस टू का दर्जा मिला. वर्तमान में यहां 1,689 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जहाँ दैनिक उपस्थिति 70 से 80 प्रतिशत रहती है, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए मात्र 8 शिक्षक और बैठने के लिए कुल 6 कमरे ही उपलब्ध हैं.
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पेड़ की छांव में पढ़ाई और थंडर जोन का बना रहता है खतरा
विद्यालय के 6 कमरों में से एक में कार्यालय, एक में प्रयोगशाला और दो में कक्षाएं चलती हैं, जबकि दो कमरे अत्यंत जर्जर हो चुके हैं. छतों से प्लास्टर गिरने और दीवारों में बड़ी दरारें होने के कारण छात्र खुले आसमान के नीचे पेड़ की छांव में बैठकर पढ़ने को विवश हैं.
यह इलाका थंडर जोन होने के कारण आकाशीय बिजली गिरने का खतरा हमेशा मंडराता रहता है. इसके अलावा परिसर में साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और तड़ित चालक जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है.
कचरे का अड्डा और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा
विद्यालय परिसर कचरा फेंकने और वाहनों का स्टैंड बन गया है. चारों ओर फैले कचरे की बदबू से बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है. वहीं, परिसर में लगे चापाकल पर वाहन चालक गाड़ियां धोते हैं और तेज आवाज में अश्लील गीत बजाते हैं.
जिला स्तरीय अधिकारियों से लेकर मुख्य सचिव तक इस समस्या से अवगत हो चुके हैं, लेकिन अब तक भवन निर्माण या मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं.
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