सिमरिया से धर्मेंद्र कुमार की रिपोर्ट
सिमरिया. प्रखंड में इन दिनों एसआइआर का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. इस दौरान दस्तावेजों में त्रुटि मिलने पर पदाधिकारी और कर्मियों द्वारा मतदाताओं से जाति व आवासीय प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं. प्रमाण पत्र बनाने के लिए आवेदकों से खतियान मांगा जा रहा है. लेकिन कई लोगों के पास जमीन और उससे संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं. इससे बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी हो रही है.
300 भुइयां लोगों के पास जमीन का दस्तावेज नहीं
मामला बन्हें पंचायत के हर्षनाथपुर गांव का है. यह गांव भुइयां बहुल है. ग्रामीणों के अनुसार, गांव में रहने वाले भुइयां समाज के करीब 300 लोगों के पास घर के अलावा कोई जमीन नहीं है. जमीन का दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण उनका जाति और आवासीय प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है.
ग्रामीणों को आशंका है कि प्रमाण पत्र नहीं बनने की स्थिति में उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है. ग्रामीणों का कहना है कि इससे वे अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं.
2003 की मतदाता सूची में नाम, लगातार करते आ रहे मतदान
ग्रामीणों ने बताया कि 2003 की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज है और वे लगातार चुनावों में मतदान करते आ रहे हैं. इसके अलावा उन्हें वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और आवास योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है.
ग्रामीणों ने पंचायत के मुखिया सुधीर कुमार सिंह को मामले की जानकारी देकर समस्या का समाधान कराने की मांग की है. ग्रामीणों के अनुसार, जमीन का दस्तावेज नहीं होने के कारण सिर्फ भुइयां समाज ही नहीं, बल्कि अन्य समाज के लोग भी जाति और आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने में परेशानी झेल रहे हैं.
जमींदारों ने वर्षों पहले रहने के लिए दी थी जमीन : मुखिया
मुखिया सुधीर कुमार सिंह ने कहा कि कई वर्ष पहले जमींदारों ने भुइयां समाज के लोगों को रहने के लिए जमीन देकर यहां बसाया था. तब से वे इसी स्थान पर रह रहे हैं. उनके पास खेती या अन्य जमीन नहीं है.
इसके बावजूद 2003 की मतदाता सूची में उनके नाम दर्ज हैं और वे हर चुनाव में मतदान करते आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, अनुमंडल प्रशासन और अंचल प्रशासन से वंचित लोगों का जाति व आवासीय प्रमाण पत्र बनाने की मांग की जा रही है, ताकि दस्तावेज के अभाव में उन्हें किसी अधिकार से वंचित न होना पड़े.
