Chaibasa News : उदालखाम गांव जाने के लिए सड़क नहीं, पगडंडी सहारा

मरीज को खटिया पर लिटाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाते हैं ग्रामीण

झींकपानी. टोंटो प्रखंड का राजस्व ग्राम उदालखाम मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. उदालखाम गांव टोंटो पंचायत से लगभग छह किलोमीटर दूर जंगल के बीच स्थित है. यहां की आबादी लगभग 300 है. यह जगन्नाथपुर विधानसभा में पड़ता है. गांव आने-जाने के लिए अभी तक सड़क नहीं बनी है. पगडंडी ही एकमात्र सहारा है. बारिश के दिनों में यह पगडंडी फिसलन भरी हो जाती है. इसपर ग्रामीण फिसलकर घायल होते रहते हैं. ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पक्की सड़क नहीं देखी है. गांव में सड़क नहीं होने से स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच पाती है. जब कोई बीमार पड़ता है, तो उसे गांव से साइकिल पर खाट पर लिटाकर बांदाबेड़ा सड़क तक लाया जाता है. यहां से मरीज को टोंटो स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जाता है.

सिर्फ चुनाव के समय दिखते हैं नेता

उदालखाम गांव में चुनाव के समय ही प्रतिनिधियों का आवागमन होता है. चुनाव के बाद गांव में जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि व प्रशासनिक पदाधिकारी व कर्मचारी इस गांव की ओर कभी रुख नहीं करते हैं. गांव के लगभग 90 फीसदी लोग अशिक्षित हैं. गांव में एक प्राथमिक विद्यालय है, जो एकमात्र पारा शिक्षक के भरोसे चल रहा है. गांव में पेयजल की समस्या बनी रहती है. गांव में दो चापाकल हैं, जो अक्सर खराब रहता है. पेयजल के लिए ग्रामीण चुआं का सहारा लेते हैं. बारिश के समय नदी व नाला के पानी को ग्रामीणों को छानकर पीना पड़ता है.

मोबाइल टावर लगा है, पर शुरू नहीं किया गया :

ग्रामीण जलावन लकड़ी, दातून, पत्ता, वनोत्पाद व कुरकुट बेचकर जीविकोपार्जन करते हैं. सरकार व प्रशासन विकास का ढिंढोरा पीटती है, पर उदालखाम में आज तक मोबाइल सेवा भी नहीं पहुंची है. गांव में मोबाइल टावर लगा है, पर सेवा शुरू नहीं की गयी है. ग्रामीण टुपरा सिद्धू, दासो सिद्धू, चेतना सिद्धू, राम सिद्धू, डुबरा लागुरी, चेतना सिद्धू, कृष्णा सिद्धू, सोमा सिद्धू, सामूचरण सिद्धू ने जिला प्रशासन व प्रतिनिधियों से मांग की है कि बांदाबेड़ा से उदालखाम होते हुए मसूरीबुरु तक सड़क का निर्माण हो.

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Author: ATUL PATHAK

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