चाईबासा. चाईबासा के टुंगरी स्थित सत्संग विहार में श्री श्री ठाकुर अनुकूलचंद्र जी की 137वीं जयंती धूमधाम से मनायी गयी. मुख्य वक्ता के रूप में डॉ मानस मिश्रा ने ठाकुर अनुकूल चन्द्रजी के भावादर्श के संबंध में विस्तृत वर्णन किया. सत्संग विहार चाईबासा के मुख्य संस्थापक श्री रविचंद्र श्रीवास्तव जी की दिव्य अनुभूतियों को लोगों के समक्ष रखा. बेंगलुरु से आये डॉ अरुण श्रीवास्तव ने दीक्षा ध्यान सतनाम मनन इष्टभृति के संबंध में विशेष रूप से जानकारी दी. बताया कि आशावाद एवं निराशावाद के इस मिश्रित दौर में जीवन के मूलभूत समस्याओं से निकलने के लिए जीवन में आदर्श पुरुष सद्गुरु पुरुषोत्तम की भूमिका से मुख मोड़ा नहीं जा सकता है. अपनी कृति संस्कृति की रक्षा व पोषण के लिए सत् दीक्षा संस्कार के महत्व को झुठलाया नहीं जा सकता है. यह जीवन में नई आशा, विश्वास का संचार कर हमें जीवन की जटिलताओं से मुक्त कर देता है. ठाकुर जी कहते हैं, कि दीक्षा का मतलब निष्ठा है. व्यक्ति, दंपती, समाज और राष्ट्र की उन्नति आदर्श के बिना अधूरा है. जब मनुष्य केन्द्रित होकर आगे बढ़ता है तो देश, समाज, व्यक्ति, दंपती और भी द्रुतगति से उन्नति करता है. कार्यक्रम का संचालन विश्वनाथ साधु गालुडीह सत्संग विहार, गोकुल चन्द्र महतो चक्रधरपुर सत्संग विहार, अमरनाथ ठाकुर बड़ा जामदा सत्संग द्वारा किया गया. इस मौके पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी. इस धार्मिक अनुष्ठान में पश्चिमी सिंहभूम. पूर्वी सिंहभूम. सरायकेला, खरसावां, गालूडीह, गुवा, जामदा, टाटानगर आदि के श्रद्धालु पहुंचे थे.
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