जैंतगढ़: झारखंड में पारा शिक्षकों की लंबी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार द्वारा सहायक आचार्य पद के लिए अलग से विज्ञापन (संख्या 04/2026) जारी किया गया है. इसके तहत वर्ग 1 से 5 और 6 से 8 में कुल 7,229 पदों पर कर्मचारी चयन आयोग द्वारा परीक्षा ली जानी है. हालांकि, विज्ञापन का ड्राफ्ट सामने आते ही पारा शिक्षकों में भारी असंतोष फैल गया है और उन्होंने इसे 'गड़बड़ियों का पिटारा' करार दिया है.
पारा शिक्षकों का सबसे बड़ा विरोध ओबीसी आरक्षण शून्य किए जाने, उर्दू शिक्षकों तथा सीटेट पास अभ्यर्थियों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने को लेकर है. पारा शिक्षक नेता शंकर गुप्ता ने कहा कि सरकार की नीयत बहाली पूरी करने की नहीं है. उन्होनें कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश विभागीय स्तर पर समायोजन का था, न कि किसी नई परीक्षा का.
सरकार जानबूझकर विज्ञापन को कानूनी दांव-पेच में फंसाना चाहती है. उन्होंने बताया कि सृजित पद 7,229 हैं जबकि टेट पास पारा शिक्षक 6,000 से भी कम हैं. ऐसे में संघ इस विज्ञापन के खिलाफ जल्द कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा. वहीं, संघ के नेता दीपक कुमार बेहरा ने इसे एक बड़ा षड्यंत्र बताया.
उन्होंने कहा कि वर्ग 1 से 5 और 6 से 8 के सामाजिक विज्ञान विषय में ओबीसी कोटा शून्य कर दिया गया है, जबकि टेट पास पारा शिक्षकों में आधी से अधिक आबादी ओबीसी श्रेणी की है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुख्यमंत्री इसमें तत्काल सुधार कर पुनः संशोधित विज्ञापन जारी नहीं करते हैं, तो राज्यभर के पारा शिक्षक उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.
