चक्रधरपुर : बच्चे जिस भाषा में घर पर सहजता से अपनी बात कहते और समझते हैं, अब वही भाषा उनकी पढ़ाई का मजबूत आधार बनेगी. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और निपुण भारत अभियान के तहत पलाश–बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम के जरिए कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों के सीखने को आसान और प्रभावी बनाने की पहल की जा रही है. इसी उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, चैनपुर में चार दिवसीय गैर-आवासीय प्रशिक्षण शुरू हुआ है.
305 स्कूलों में पहुंचेगा बहुभाषी शिक्षा का मॉडल
18 से 21 अगस्त तक चलने वाले प्रशिक्षण में पश्चिमी सिंहभूम जिले के 305 चयनित विद्यालयों में कार्यक्रम के क्रियान्वयन को लेकर शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. तांतनगर, सदर चाईबासा, खूंटपानी, चक्रधरपुर, बंदगांव, सोनुआ, गोईलकेरा और मनोहरपुर प्रखंडों से कुल 150 शिक्षक-शिक्षिकाएं प्रशिक्षण में शामिल हुए हैं. इनमें 79 शिक्षक और 71 शिक्षिकाएं हैं.
किताबी भाषा नहीं, बच्चों की परिचित भाषा पर जोर
प्रशिक्षण में बच्चों की घर की भाषा को कक्षा में सीखने का आधार बनाने पर विशेष जोर दिया गया. द्विभाषी पाठ्यपुस्तकों के इस्तेमाल के साथ शिक्षकों को बताया गया कि परिचित भाषा के जरिए बच्चों को विषय समझाना उनके आत्मविश्वास और कक्षा में सहभागिता को बढ़ा सकता है. शिक्षकों ने अपने विद्यालयों के अनुभव भी साझा किए. उन्होंने बताया - बच्चों की परिचित भाषा का इस्तेमाल करने से उनकी पढ़ाई में रुचि और सक्रिय भागीदारी में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है.
एक कमरे में अलग-अलग कक्षाओं को पढ़ाने की रणनीति
प्रशिक्षण में बहु-कक्षा शिक्षण भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा. शिक्षक संदर्शिका की मदद से एक ही कक्षा-कक्ष में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को उनकी सीखने की जरूरत के अनुसार व्यवस्थित कर पढ़ाने की व्यावहारिक रणनीतियों पर चर्चा की गई. साथ ही बच्चों के पढ़ने, लिखने, समझने और अपनी बात व्यक्त करने में आने वाली चुनौतियों, उनके कारणों और समाधान के तरीकों पर भी शिक्षकों ने अनुभव साझा किए.
विशेषज्ञों ने दिए व्यवहारिक टिप्स
लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन की ओर से शैलेन्द्र अवस्थी, निशा गुप्ता, सोनी देवी, उषा कुमारी, संदीप शंख और विवान्शु कुमार ने प्रशिक्षक के रूप में शिक्षकों का मार्गदर्शन किया. द्विभाषी पाठ्यपुस्तकों और अलग-अलग शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आए बदलावों पर भी चर्चा की गई.
सीखना होगा आसान, सहज और आनंददायक
प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को बहुभाषी और बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों के लिए तैयार करना है, ताकि कक्षा में पलाश कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके. पहल के जरिए बच्चों के लिए पढ़ाई को डर से नहीं, अपनी भाषा और समझ से जोड़कर आसान, आनंददायक और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
